मुस्लिम
जमात-उल-विदा 2027 Jamat-ul-Vida
रमज़ान का आख़िरी जुमा
शुक्रवार, 5 मार्च 2027
चंद्र पंचांग: 5 मार्च 2027
Last Friday of रमज़ान 1448 हिजरी (इस्लामी हिजरी कैलेंडर)
हिजरी महीना नया चाँद दिखने पर शुरू होता है, इसलिए भारत में तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
जमात-उल-विदा हिजरी साल के नौवें महीने रमज़ान का आख़िरी जुमा है, जो ईद-उल-फ़ित्र से ठीक पहले आता है।
जमात-उल-विदा रमज़ान का आख़िरी जुमा है, जब मुसलमान रोज़ों के पाक महीने को अलविदा कहने के लिए बड़ी संख्या में जुमे की नमाज़ के लिए जुटते हैं।
तारीख कैसे तय होती है: इस्लामी चंद्र कैलेंडर में रमज़ान का आख़िरी जुमा। सही तारीख चाँद दिखने पर निर्भर करती है।
जमात-उल-विदा क्यों मनाते हैं
जमात-उल-विदा, जिसे जुमातुल विदा या अलविदा जुमा भी कहते हैं, का अर्थ है विदाई का जुमा। यह रोज़ों के महीने रमज़ान का आख़िरी जुमा है, और मुसलमान इसे नमाज़, संयम और ख़ैरात के एक महीने को अलविदा कहने का मौक़ा मानते हैं। इस्लाम में जुमे की नमाज़ का पहले से ही ख़ास दर्जा है, और रमज़ान के आख़िरी दिनों में इसे अदा करना और भी भावुक होता है।
बहुत से लोग इस दिन माफ़ी माँगते हैं, परिवार और समाज के लिए दुआ करते हैं और ईद के बाद भी इस महीने की अच्छी आदतों को बनाए रखने का इरादा करते हैं। मस्जिदों में साल की कुछ सबसे बड़ी जमातें इसी दिन होती हैं।
जमात-उल-विदा का इतिहास और कथा
क़ुरआन में जुमे के नाम पर एक सूरह है, सूरह अल-जुमुआ, जो ईमान वालों से कहती है कि जब जुमे की नमाज़ की अज़ान हो, तो ख़रीद-फ़रोख़्त छोड़कर अल्लाह की याद की ओर आएँ। इस्लामी मान्यता के अनुसार रमज़ान वह महीना है जिसमें पैग़ंबर मुहम्मद पर पहली बार क़ुरआन नाज़िल हुआ, और इसकी आख़िरी दस रातों में लैलतुल क़द्र, यानी शब-ए-क़द्र, आती है। इसलिए आख़िरी जुमा इस्लामी साल के सबसे पाक दिनों के बीच पड़ता है।
इस्लामी विद्वान बताते हैं कि क़ुरआन और हदीस इस जुमे को अलग से कोई त्योहार नहीं बताते। दक्षिण एशिया और दूसरे मुस्लिम इलाक़ों में रिवाज के ज़रिए इसकी अहमियत बढ़ी है, जहाँ लोग इसे महीने में जुमे की बड़ी जमात में शामिल होने का आख़िरी मौक़ा मानते हैं।
जमात-उल-विदा कैसे मनाते हैं
रमज़ान के हर दिन की तरह रोज़ा भोर से पहले सहरी से सूर्यास्त पर इफ़्तार तक चलता है। पुरुष दोपहर को जुमे की नमाज़ के लिए जुटते हैं, और मस्जिदें अक्सर आसपास की सड़कों तक भर जाती हैं, इसलिए शहर की पुलिस आमतौर पर ट्रैफ़िक डायवर्ज़न की योजना बनाती है। इमाम का ख़ुतबा ख़त्म होते महीने, सब्र की अहमियत और ख़ैरात के फ़र्ज़ पर होता है। बहुत से परिवार इसी समय ज़कात या सदक़ा-ए-फ़ित्र अदा करते हैं, ताकि ग़रीब घर भी ईद मना सकें। महिलाएँ घर पर या उन मस्जिदों में नमाज़ पढ़ती हैं जहाँ उनके लिए जगह होती है। ईद की ख़रीदारी के कारण बाज़ार देर रात तक गुलज़ार रहते हैं।
महत्वपूर्ण दिन और पल
- सहरी (भोर से पहले, शुक्रवार, 20 मार्च 2026)
रमज़ान के हर दिन की तरह परिवार भोर से पहले सहरी करते हैं और रोज़ा शुरू करते हैं। - जुमे की नमाज़ और ख़ुतबा (दोपहर)
बड़ी जमातें जुमे की नमाज़ अदा करती हैं और रमज़ान के आख़िरी दिनों पर ख़ुतबा सुनती हैं। - इफ़्तार (सूर्यास्त)
खजूर और पानी से रोज़ा खोला जाता है, फिर परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर खाना खाया जाता है।
भारत भर में जमात-उल-विदा
भारत में सबसे बड़ी जमातें दिल्ली की जामा मस्जिद, हैदराबाद की मक्का मस्जिद, भोपाल की ताज-उल-मसाजिद और लखनऊ, कोलकाता और मुंबई की बड़ी मस्जिदों में होती हैं। कश्मीर में श्रीनगर की जामिया मस्जिद में भारी भीड़ जुटती है। उत्तराखंड में देहरादून, हरिद्वार ज़िले, रुड़की और हल्द्वानी की मस्जिदों में जुमे की नमाज़ में भारी भीड़ होती है।
तारीख एक हफ़्ता आगे-पीछे हो सकती है। अगर रमज़ान 29 दिन में पूरा हो और ईद जुमे को पड़े, तो विदाई का जुमा उससे पहले वाला जुमा हो जाता है। 2026 की तारीख 30 दिन के रमज़ान और शनिवार, 21 मार्च को ईद मानकर दी गई है।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- अलविदा जुमा
- विदाई का जुमा
- जुमात-उल-विदा
- जुमातुल विदा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में जमात-उल-विदा कब है?
जमात-उल-विदा शुक्रवार, 5 मार्च 2027 को है।
क्या जमात-उल-विदा पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या जमात-उल-विदा केंद्र सरकार की छुट्टी है?
जमात-उल-विदा प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।
जमात-उल-विदा के अन्य नाम क्या हैं?
जमात-उल-विदा को अलविदा जुमा, विदाई का जुमा, जुमात-उल-विदा और जुमातुल विदा भी कहा जाता है।
जमात-उल-विदा का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है विदाई का जुमा। यह पाक महीने रमज़ान का आख़िरी जुमा है।
जमात-उल-विदा क्यों अहम है?
इस्लाम में जुमे की नमाज़ ख़ास है, और यह जुमा सबसे पाक महीने रमज़ान के आख़िरी दिनों में आता है। मुसलमान इस दिन दुआ करते हैं, माफ़ी माँगते हैं और ईद की तैयारी करते हैं।
जमात-उल-विदा की तारीख कैसे तय होती है?
यह ईद-उल-फ़ित्र से पहले का आख़िरी जुमा है। ईद नया चाँद दिखने पर निर्भर करती है, इसलिए अगर रमज़ान 30 के बजाय 29 दिन का हो, तो विदाई का जुमा बदल सकता है।
क्या जमात-उल-विदा सार्वजनिक अवकाश है?
नहीं। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश है, इसलिए ज़्यादातर दफ़्तर खुले रहते हैं।
अगले 30 दिनों के मुस्लिम त्योहार
अगले 30 दिनों में कोई और त्योहार नहीं।
प्रमुख मुस्लिम त्योहार
- 10 मार्चबुधईद-उल-फ़ित्र
- 17 मईसोमईद-उल-अज़हा (बकरीद)
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