मुस्लिम
ईद-उल-फ़ित्र 2027 Eid-ul-Fitr
रमज़ान के रोज़ों के बाद की ईद
बुधवार, 10 मार्च 2027
तारीख चाँद दिखने पर निर्भर है और एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। दफ़्तर त्योहार के पास घोषित तारीख मानते हैं।
चंद्र पंचांग: 10 मार्च 2027
1 शव्वाल 1448 हिजरी (इस्लामी हिजरी कैलेंडर)
हिजरी महीना नया चाँद दिखने पर शुरू होता है, इसलिए भारत में तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के बाद वाले महीने शव्वाल का पहला दिन है। यह तब शुरू होती है जब रमज़ान की 29वीं या 30वीं तारीख़ की शाम को नया चाँद दिखता है।
ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के अंत में रोज़ा खोलने का त्योहार है, जिसे ईद की नमाज़, ग़रीबों को दान, नए कपड़ों, मीठी सेवइयों और परिवार से मेल-मुलाक़ात के साथ मनाया जाता है।
तारीख कैसे तय होती है: इस्लामी चंद्र कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल की 1 तारीख़; सही तारीख़ नए चाँद के दिखने पर निर्भर करती है
ईद-उल-फ़ित्र क्यों मनाते हैं
ईद-उल-फ़ित्र रोज़ा खोलने का त्योहार है। यह रमज़ान के ठीक बाद शव्वाल के पहले दिन आती है। रमज़ान वह महीना है जिसमें स्वस्थ वयस्क मुसलमान सुबह से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। फ़ित्र शब्द का अर्थ रोज़ा खोलना है, और यह दिन ख़ुद एक इनाम है: ईद के दिन मुसलमानों को रोज़ा रखने की इजाज़त नहीं है।
ईमान वाले ईद को अल्लाह के शुक्र का दिन मानते हैं, जिसने उन्हें रोज़े पूरे करने की ताक़त दी। यह उतना ही देने का दिन भी है। ईद की नमाज़ से पहले हर वह मुस्लिम परिवार जो इसका ख़र्च उठा सकता है, सदक़ा-ए-फ़ित्र अदा करता है, जिसे फ़ितरा भी कहते हैं। यह परिवार के हर सदस्य की ओर से तय दान होता है, ताकि कोई ग़रीब परिवार जश्न से छूट न जाए। यह त्योहार माफ़ी पर भी ज़ोर देता है। लोग पुराने झगड़े ख़त्म करते हैं, रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं और गले मिलकर ईद मुबारक कहते हैं।
भारत में इस दिन का सामाजिक दायरा बहुत बड़ा है। हर धर्म के पड़ोसी मीठी सेवइयाँ खाने आते हैं, दफ़्तरों और स्कूलों में शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है, और बाज़ार कई दिनों तक गुलज़ार रहते हैं। मिठाइयों की इतनी बड़ी भूमिका के कारण उत्तर भारत में बहुत से लोग इसे मीठी ईद कहते हैं, ताकि इसे बकरीद से अलग पहचाना जा सके।
ईद-उल-फ़ित्र का इतिहास और कथा
इस्लामी परंपरा के अनुसार पैग़ंबर मुहम्मद ने मक्का से मदीना जाने के बाद दोनों ईदों की शुरुआत की। मदीना के लोगों के जश्न के दो दिन थे, और उन्होंने उनसे कहा कि अल्लाह ने उन्हें इनसे बेहतर दो दिन दिए हैं: ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा। पहली ईद-उल-फ़ित्र हिजरी कैलेंडर के दूसरे साल में, लगभग 624 ईस्वी में मानी जाती है, उस पहले रमज़ान के बाद जिसमें रोज़ा फ़र्ज़ हुआ था।
रमज़ान ख़ुद वह्य (ईश्वरीय संदेश) की याद से जुड़ा है। मुसलमानों का विश्वास है कि क़ुरान इसी महीने में मक्का के पास हिरा की गुफा में पैग़ंबर पर पहली बार नाज़िल हुआ था। क़ुरान रोज़े को फ़र्ज़ बताता है और उसका मक़सद भी समझाता है: अल्लाह के प्रति सजगता (तक़वा) और आत्म-संयम पैदा करना, और ईमान वाले को ग़रीबों की भूख का एहसास कराना। ईद अनुशासन के उस महीने को सामूहिक नमाज़ और दावत के साथ पूरा करती है।
इस्लामी कैलेंडर पूरी तरह चंद्र आधारित है, जिसमें एक साल में लगभग 354 दिन होते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर के मुक़ाबले ईद हर साल लगभग ग्यारह दिन पहले आ जाती है। लगभग 33 सालों में यह हर मौसम से गुज़र जाती है। 2026 में यह मार्च में, उत्तर भारत की सर्दी के आख़िरी दिनों में पड़ रही है, और 2030 के दशक की शुरुआत तक यह जनवरी के ठंडे महीने में पड़ने लगेगी।
ईद-उल-फ़ित्र कैसे मनाते हैं
त्योहार एक शाम पहले चाँद रात से शुरू होता है। परिवार नया चाँद देखने छतों पर चढ़ते हैं, या स्थानीय रुयत-ए-हिलाल कमेटी के चाँद दिखने के ऐलान का इंतज़ार करते हैं। चाँद दिखते ही बाज़ार ख़रीदारों से भर जाते हैं, जो कपड़े, चूड़ियाँ, मिठाइयाँ और मेहँदी ख़रीदते हैं, और महिलाएँ व लड़कियाँ देर रात तक मेहँदी लगाती हैं।
ईद की सुबह मुसलमान पैग़ंबर की सुन्नत के अनुसार नहाते हैं, नए या अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनते हैं, इत्र लगाते हैं और घर से निकलने से पहले कुछ मीठा खाते हैं, अक्सर खजूर। सदक़ा-ए-फ़ित्र नमाज़ से पहले अदा करना ज़रूरी है। फिर पुरुष, और कई जगहों पर महिलाएँ और बच्चे भी, ईद की नमाज़ के लिए ईदगाह या किसी बड़ी मस्जिद जाते हैं। यह दो रकात की सामूहिक नमाज़ होती है जिसमें अतिरिक्त तकबीरें कही जाती हैं, और इसके बाद ख़ुतबा होता है। नमाज़ के बाद लोग आमतौर पर तीन बार गले मिलते हैं और ईद मुबारक कहते हैं।
बाक़ी दिन परिवार और दोस्तों के नाम होता है। बड़े लोग बच्चों को ईदी देते हैं, जो नक़द या छोटे उपहार होते हैं। रसोई में सेवइयों, दूध, खजूर और मेवों से शीर ख़ुरमा बनता है, साथ में क़िमामी सेवइयाँ, बिरयानी, कबाब और फ़िरनी भी। बहुत से परिवार अपने गुज़रे रिश्तेदारों की क़ब्रों पर जाकर उनके लिए दुआ करते हैं। अगले कुछ दिनों तक रिश्तेदार और पड़ोसी एक-दूसरे के घर आते-जाते रहते हैं, और ईद मिलन के आयोजन सभी समुदायों के लोगों को एक साथ लाते हैं।
महत्वपूर्ण दिन और पल
- चाँद रात (20 मार्च 2026 की शाम, चाँद दिखने के बाद)
परिवार नया चाँद देखते हैं। ऐलान होते ही बाज़ार ईद के लिए कपड़े, मिठाइयाँ और मेहँदी ख़रीदने वालों से भर जाते हैं। - सदक़ा-ए-फ़ित्र (ईद की नमाज़ से पहले)
हर परिवार अपने हर सदस्य की ओर से तय दान अदा करता है, ताकि ग़रीब परिवार भी ईद मना सकें। - ईद की नमाज़ (शनिवार, 21 मार्च 2026 की सुबह)
नमाज़ी ईद की ख़ास नमाज़ और ख़ुतबे के लिए ईदगाह या किसी बड़ी मस्जिद में जुटते हैं, फिर गले मिलकर मुबारकबाद देते हैं। - ईद की दावत और ईदी (ईद का बाक़ी दिन)
परिवार शीर ख़ुरमा, सेवइयाँ और बिरयानी साथ खाते हैं, और बड़े लोग बच्चों को ईदी देते हैं। - ईद मिलन (अगले कुछ दिन)
हर धर्म के रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी एक-दूसरे से मिलने जाते हैं और सामुदायिक आयोजनों में मिलते हैं।
भारत भर में ईद-उल-फ़ित्र
भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक रहती है, और हर क्षेत्र में ईद का रंग थोड़ा अलग होता है। दिल्ली में जामा मस्जिद और पुरानी दिल्ली की गलियों में देश की सबसे बड़ी ईद की नमाज़ों में से एक होती है, और सड़कों के किनारे खाने के ठेले लगते हैं। लखनऊ अपनी ऐशबाग़ ईदगाह और सेवइयों की कई क़िस्मों के लिए जाना जाता है। हैदराबाद में लगभग हर घर में शीर ख़ुरमा परोसा जाता है। केरल में इस त्योहार को चेरिया पेरुन्नाल, यानी छोटा त्योहार, कहते हैं और बिरयानी व पायसम के साथ मनाते हैं। कश्मीर में परिवार स्थानीय बेकरियों से ख़ास रोटियाँ ख़रीदते हैं और घाटी भर में रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं। पश्चिम बंगाल और असम में ईद की ख़रीदारी और दावतें बड़े पैमाने पर होती हैं।
उत्तराखंड में देहरादून की ईदगाह और हरिद्वार ज़िले, रुड़की, हल्द्वानी और ऊधम सिंह नगर के बड़े जमावड़ों में नमाज़ के लिए भारी भीड़ जुटती है। चाँद रात को देहरादून के पुराने बाज़ारों में दुकानें देर तक खुली रहती हैं, और अगले कुछ दिनों तक ईद मिलन के कार्यक्रम होते हैं।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- चेरिया पेरुन्नाल
- ईद अल-फ़ित्र
- मीठी ईद
- रमज़ान ईद
- ईद-उल-अज़हा (बकरीद) 17 मई 2027
- रमज़ान की शुरुआत
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में ईद-उल-फ़ित्र कब है?
ईद-उल-फ़ित्र बुधवार, 10 मार्च 2027 को है। तारीख चाँद दिखने पर निर्भर है और एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
क्या ईद-उल-फ़ित्र पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या ईद-उल-फ़ित्र केंद्र सरकार की छुट्टी है?
हाँ। ईद-उल-फ़ित्र 2027 में केंद्र सरकार के सभी दफ़्तरों की अनिवार्य छुट्टियों में से एक है।
ईद-उल-फ़ित्र के अन्य नाम क्या हैं?
ईद-उल-फ़ित्र को चेरिया पेरुन्नाल, ईद अल-फ़ित्र, मीठी ईद और रमज़ान ईद भी कहा जाता है।
ईद-उल-फ़ित्र क्यों मनाई जाती है?
यह रोज़ों के महीने रमज़ान के अंत का प्रतीक है। मुसलमान रोज़े पूरे करने की ताक़त के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और नमाज़, दान और दावत के ज़रिए अपनी ख़ुशी बाँटते हैं।
ईद की तारीख़ कैसे तय होती है?
ईद शव्वाल के पहले दिन होती है, जो 29वें या 30वें रोज़े के बाद नया चाँद दिखने पर शुरू होता है। स्थानीय चाँद कमेटियाँ एक शाम पहले इसका ऐलान करती हैं।
सदक़ा-ए-फ़ित्र या फ़ितरा क्या है?
यह एक तय दान है जिसे हर सक्षम मुस्लिम परिवार ईद की नमाज़ से पहले अपने हर सदस्य की ओर से अदा करता है। इससे ग़रीब परिवारों को ईद मनाने में मदद मिलती है।
इसे मीठी ईद क्यों कहते हैं?
शीर ख़ुरमा और सेवइयों जैसे मीठे पकवान इस दिन का केंद्र होते हैं, इसलिए उत्तर भारत में बहुत से लोग इसे मीठी ईद कहते हैं। इससे यह ईद-उल-अज़हा, यानी बकरीद, से अलग पहचानी जाती है।
ईद हर साल पहले क्यों आ जाती है?
इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा के अनुसार चलता है और इसमें लगभग 354 दिन होते हैं, जो सौर वर्ष से ग्यारह कम हैं। इसलिए ईद हर साल लगभग ग्यारह दिन पहले आ जाती है।
अगले 30 दिनों के मुस्लिम त्योहार
अगले 30 दिनों में कोई और त्योहार नहीं।
प्रमुख मुस्लिम त्योहार
- 17 मईसोमईद-उल-अज़हा (बकरीद)
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