मुस्लिम
हज़रत अली का जन्मदिन 2026 Hazrat Ali's Birthday
हज़रत अली का जन्मदिन
बुधवार, 23 दिसंबर 2026
तारीख चाँद दिखने पर निर्भर है और एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। दफ़्तर त्योहार के पास घोषित तारीख मानते हैं।
2027 में: रविवार, 12 दिसंबर 2027
चंद्र पंचांग: 23 दिसं 2026
13 रजब 1448 हिजरी (इस्लामी हिजरी कैलेंडर)
हिजरी महीना नया चाँद दिखने पर शुरू होता है, इसलिए भारत में तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
हज़रत अली का जन्मदिन रजब की 13 तारीख को मनाया जाता है। हिजरी साल सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है, इसलिए 2026 में यह दो बार पड़ा।
हज़रत अली का जन्मदिन पैग़ंबर मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली इब्न अबी तालिब की पैदाइश का दिन है, जिन्हें उनके इंसाफ़, इल्म और बहादुरी के लिए याद किया जाता है।
तारीख कैसे तय होती है: इस्लामी चंद्र कैलेंडर के सातवें महीने रजब की 13 तारीख। सही तारीख चाँद दिखने पर निर्भर करती है।
हज़रत अली का जन्मदिन क्यों मनाते हैं
मुसलमान हज़रत अली को गहरे ईमान, इंसाफ़ और सादगी भरी ज़िंदगी वाले इंसान के रूप में याद करते हैं। वे पैग़ंबर के चचेरे भाई थे, उन्हीं के घर में पले-बढ़े और बाद में उनकी बेटी फ़ातिमा से निकाह किया। शिया मुसलमान उन्हें पहले इमाम के रूप में मानते हैं। सुन्नी मुसलमान उन्हें चार ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीन में चौथे ख़लीफ़ा के रूप में सम्मान देते हैं। दोनों परंपराएँ उन्हें बहुत ऊँचा दर्जा देती हैं, इसलिए यह दिन पूरे समुदाय के लिए मायने रखता है।
उनकी उपाधियाँ बताती हैं कि लोग उन्हें कैसे देखते थे। बहादुरी के लिए उन्हें असदुल्लाह, यानी अल्लाह का शेर, और हैदर कहा जाता है। पैग़ंबर से जुड़ी एक हदीस उन्हें इल्म के शहर का दरवाज़ा बताती है। उनके ख़ुतबे, ख़त और छोटे-छोटे क़ौल बाद में नहजुल बलाग़ा नाम की किताब में जमा किए गए, जो आज भी शासन, ईमानदारी और ग़रीबों की फ़िक्र पर उसकी सीख के लिए पढ़ी जाती है।
भारत में इस दिन का सूफ़ी रिश्ता भी है। ज़्यादातर सूफ़ी सिलसिले, जिनमें उपमहाद्वीप में बेहद प्रिय चिश्ती सिलसिला भी शामिल है, अपनी रूहानी कड़ी हज़रत अली तक जोड़ते हैं। अमीर ख़ुसरो से जुड़ी मशहूर क़व्वाली मन कुंतो मौला उन शब्दों पर आधारित है जो माना जाता है कि पैग़ंबर ने उनके बारे में कहे थे।
हज़रत अली का जन्मदिन का इतिहास और कथा
अली का जन्म लगभग 600 ईस्वी में मक्का में पैग़ंबर के चाचा अबू तालिब और फ़ातिमा बिन्त असद के घर हुआ था। मुस्लिम परंपरा, ख़ासकर शिया परंपरा, के अनुसार उनका जन्म ख़ुद काबा के अंदर हुआ था। बचपन में ही वे इस्लाम क़बूल करने वाले सबसे पहले लोगों में थे।
622 ईस्वी में जब पैग़ंबर मक्का छोड़कर मदीना गए, तो उस रात अली उनके बिस्तर पर सोए, ताकि दुश्मनों को उनके जाने का पता न चले। बाद में वे इस्लाम की शुरुआती जंगों में लड़े, जिनमें बद्र, उहुद और ख़ैबर शामिल हैं। 656 ईस्वी में तीसरे ख़लीफ़ा उस्मान की हत्या के बाद वे ख़लीफ़ा बने और अपनी राजधानी आज के इराक़ के कूफ़ा में ले गए।
उनके शासन में आपसी संघर्ष हुए। 661 ईस्वी में रमज़ान के दौरान कूफ़ा की मस्जिद में नमाज़ पढ़ते समय उन पर ज़हर बुझी तलवार से वार किया गया और दो दिन बाद उनका इंतक़ाल हो गया। इराक़ के नजफ़ में उनका रौज़ा शिया मुसलमानों के सबसे ज़्यादा जाए जाने वाले ज़ियारत स्थलों में से एक है।
हज़रत अली का जन्मदिन कैसे मनाते हैं
इस दिन के लिए कोई तय अनिवार्य रस्में नहीं हैं। परिवार और मस्जिद कमेटियाँ इसे सादगी और ख़ुशी से मनाती हैं। इमामबाड़ों, मस्जिदों और घरों की सफ़ाई होती है और उन्हें रोशनी से सजाया जाता है। शाम को लोग महफ़िल या जश्न के लिए जुटते हैं, जहाँ शायर हज़रत अली की शान में क़सीदा और मनक़बत पढ़ते हैं और उलेमा उनकी ज़िंदगी और तालीमात पर बात करते हैं।
नियाज़ के रूप में मिठाइयाँ और खाना बाँटा जाता है। बहुत से लोग सदक़ा देते हैं, ग़रीबों को खाना खिलाते हैं या किसी ज़रूरतमंद परिवार की मदद करते हैं, क्योंकि कमज़ोरों के साथ दरियादिली उनकी याद से गहराई से जुड़ी है। कुछ लोग अतिरिक्त नफ़्ल नमाज़ पढ़ते हैं और नहजुल बलाग़ा पढ़ते हैं। लोग एक-दूसरे को इस दिन की मुबारकबाद देते हैं और बच्चों को अक्सर उनकी बहादुरी और इंसाफ़ के क़िस्से सुनाए जाते हैं।
महत्वपूर्ण दिन और पल
- 2026 का पहला मौक़ा (13 रजब 1447, संभावित शनिवार, 3 जनवरी 2026)
इस साल जन्मदिन जनवरी की शुरुआत में पड़ता है। सही तारीख रजब का चाँद दिखने पर निर्भर करती है। - शाम की महफ़िल और जश्न (जन्मदिन की शाम)
लोग मस्जिदों, इमामबाड़ों और हॉलों में शायरी, उनकी ज़िंदगी पर तक़रीरों और मिठाई बाँटने के लिए जुटते हैं। - 2026 का दूसरा मौक़ा (13 रजब 1448, संभावित बुधवार, 23 दिसंबर 2026)
चंद्र वर्ष छोटा होने के कारण जन्मदिन उसी साल दिसंबर के आख़िर में फिर आता है।
भारत भर में हज़रत अली का जन्मदिन
अपनी लंबी शिया विरासत वाले लखनऊ में उत्तर भारत के कुछ सबसे बड़े जश्न होते हैं, जहाँ पुराने शहर में इमामबाड़े रोशन होते हैं और शाम को महफ़िलें सजती हैं। हैदराबाद, अमरोहा, रामपुर और लद्दाख के कारगिल इलाक़े में भी बड़े आयोजन होते हैं। मुंबई और गुजरात में दाऊदी बोहरा समुदाय अपने केंद्रों में यह दिन मनाता है। 2026 में यह दिन दो बार आता है, 3 जनवरी को और फिर लगभग 23 दिसंबर को, क्योंकि इस्लामी साल सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- हज़रत अली जयंती
- इमाम अली का जन्मदिन
- जश्न-ए-मौला अली
- विलादत-ए-अली
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में हज़रत अली का जन्मदिन कब है?
2026 में हज़रत अली का जन्मदिन दो बार है: शनिवार, 3 जनवरी 2026 और बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को। तारीख चाँद दिखने पर निर्भर है और एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
क्या हज़रत अली का जन्मदिन पर बैंक बंद रहते हैं?
2026 में हज़रत अली का जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहते हैं; हर क्षेत्र अपनी RBI अवकाश सूची मानता है। दूसरे राज्यों में बैंक खुले रहते हैं, जब तक उस दिन रविवार या दूसरा या चौथा शनिवार न हो। अपना राज्य नीचे चुनकर देखें।
हज़रत अली का जन्मदिन पर किन राज्यों में सरकारी दफ़्तर बंद रहते हैं?
2026 में हज़रत अली का जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के दफ़्तर बंद रहते हैं। पूरी अवकाश सूची के लिए नीचे अपना राज्य चुनें।
हज़रत अली का जन्मदिन किन राज्यों में प्रतिबंधित अवकाश है?
2026 में दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हज़रत अली का जन्मदिन राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित (वैकल्पिक) अवकाश है: कर्मचारी छुट्टी ले सकते हैं, पर दफ़्तर खुले रहते हैं।
क्या हज़रत अली का जन्मदिन केंद्र सरकार की छुट्टी है?
हज़रत अली का जन्मदिन प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।
क्या हज़रत अली का जन्मदिन पर शेयर बाज़ार बंद रहता है?
हज़रत अली का जन्मदिन के दिन शनिवार है, जब बाज़ार वैसे भी बंद रहते हैं।
हज़रत अली का जन्मदिन के अन्य नाम क्या हैं?
हज़रत अली का जन्मदिन को हज़रत अली जयंती, इमाम अली का जन्मदिन, जश्न-ए-मौला अली और विलादत-ए-अली भी कहा जाता है।
हज़रत अली कौन थे?
वे पैग़ंबर मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे। शिया मुसलमान उन्हें पहला इमाम और सुन्नी मुसलमान चौथा ख़लीफ़ा मानते हैं। उन्हें उनकी बहादुरी, इल्म और इंसाफ़ के लिए याद किया जाता है।
2026 में हज़रत अली का जन्मदिन दो बार क्यों आता है?
यह इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन साल से लगभग ग्यारह दिन छोटा है। इसलिए 13 रजब 3 जनवरी 2026 को पड़ी और फिर लगभग 23 दिसंबर 2026 को आएगी।
हज़रत अली का जन्म कहाँ हुआ था?
उनका जन्म मक्का में हुआ था। मुस्लिम परंपरा के अनुसार उनकी पैदाइश काबा के अंदर हुई थी।
क्या हज़रत अली के जन्मदिन पर बैंक अवकाश होता है?
केंद्र के स्तर पर यह केवल प्रतिबंधित अवकाश है। जिन राज्यों ने इसे राज्य अवकाश घोषित किया है, जैसे उत्तर प्रदेश, वहाँ बैंक बंद रहते हैं और बाक़ी जगह खुले रहते हैं।
अगले 30 दिनों के मुस्लिम त्योहार
अगले 30 दिनों में कोई और त्योहार नहीं।
प्रमुख मुस्लिम त्योहार
- 21 मार्चशनिईद-उल-फ़ित्र
- 27 मईबुधईद-उल-अज़हा (बकरीद)
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छुट्टियों और त्योहारों का कैलेंडर: अक्टूबर और नवंबर 2026
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