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कोलमतमिल नववर्ष (पुथांडु) 2027 Tamil New Year (Puthandu)

तमिल नववर्ष

बुधवार, 14 अप्रैल 2027

तमिल नववर्ष पुथांडु चित्तिरै महीने के पहले दिन आता है। इसका स्वागत कन्नी दर्शन, कोलम, मंदिर दर्शन और छह स्वादों वाली आम की पचड़ी के साथ दावत से होता है।

तारीख कैसे तय होती है: तमिल सौर माह चित्तिरै का पहला दिन, जब सूर्य निरयन मेष राशि में प्रवेश करता है; आम तौर पर 14 अप्रैल

तमिल नववर्ष (पुथांडु) क्यों मनाते हैं

पुथांडु, जिसे वरुष पिरप्पु भी कहते हैं, तमिल वर्ष का पहला दिन है। तमिल कैलेंडर सौर है, और इसका वर्ष तब शुरू होता है जब सूर्य राशिचक्र की पहली राशि मेष में प्रवेश करता है। ऐसा आम तौर पर 14 अप्रैल को होता है, इसीलिए यह तारीख़ साल दर साल लगभग नहीं बदलती।

दुनिया भर के तमिल परिवारों के लिए यह दिन नई शुरुआत है। लोग मानते हैं कि पहली सुबह जो देखा और किया जाए, वही पूरे साल की दिशा तय करता है। इसलिए घरों की सफ़ाई होती है, जहाँ तक हो सके कर्ज़ चुकाए जाते हैं, और दिन की शुरुआत शुभ दर्शन, प्रार्थना और अच्छे भोजन से होती है। यह त्योहार ऋतुओं, खेती और आकाश के उस रिश्ते का भी सम्मान करता है, जो तमिल संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है।

तमिल नववर्ष (पुथांडु) का इतिहास और कथा

तमिल खगोलशास्त्री लंबे समय से वर्ष की गणना सूर्य के मेष में प्रवेश से करते आए हैं, और सदियों से चित्तिरै के पहले महीने को नए चक्र की शुरुआत माना जाता रहा है। तमिलनाडु के मंदिर अभिलेख और पंचांग पीढ़ियों से इसी गणना का पालन करते आए हैं।

इस तारीख़ का एक राजनीतिक अध्याय भी रहा है। 2008 में तमिलनाडु सरकार ने जनवरी के मध्य में आने वाले थै महीने के पहले दिन को तमिल नववर्ष घोषित किया। 2011 में नई सरकार ने चित्तिरै के पहले दिन को फिर से बहाल कर दिया। इस पूरे समय में ज़्यादातर तमिल परिवार अप्रैल में ही पुथांडु मनाते रहे।

तमिल नववर्ष (पुथांडु) कैसे मनाते हैं

एक रात पहले घर की महिलाएँ पूजा घर में कन्नी की थाली सजाती हैं। इसमें तीन फल, आम, केला और कटहल, के साथ पान के पत्ते, सुपारी, सिक्के, सोने के गहने, फूल और एक दर्पण रखे जाते हैं। पुथांडु की सुबह परिवार के सदस्य आँखें खोलते ही साल के पहले दर्शन के रूप में यही थाली देखते हैं।

तेल स्नान के बाद सब नए कपड़े पहनते हैं। प्रवेश द्वार पर चावल के आटे से रंग-बिरंगा कोलम बनाया जाता है और दीपक जलाया जाता है। परिवार मंदिर जाते हैं, और बुज़ुर्ग नया पंचांगम पढ़ते हैं, जो आने वाले साल की भविष्यवाणियाँ और त्योहारों की तारीख़ें बताता है। छोटे सदस्य बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और उन्हें उपहार या पैसे मिलते हैं।

त्योहार के दोपहर के भोजन में आम की पचड़ी होती है, जो कच्चे आम, गुड़, नीम के फूल, इमली, मिर्च और नमक से बनती है। इसके मीठे, खट्टे, कड़वे, तीखे और नमकीन स्वाद याद दिलाते हैं कि जीवन में सुख और दुख साथ-साथ आते हैं। वड़ा, पायसम और चावल के व्यंजन भोजन को पूरा करते हैं।

महत्वपूर्ण दिन और पल

  1. कन्नी सजाना (13 अप्रैल 2026 की रात)
    पूजा घर में आम, केला, कटहल, पान के पत्ते, सिक्के, गहने, फूल और दर्पण वाली थाली सजाई जाती है।
  2. कन्नी दर्शन और तेल स्नान (सुबह जल्दी, 14 अप्रैल 2026 (मंगलवार))
    परिवार के सदस्य सबसे पहले कन्नी की थाली देखते हैं, फिर तेल स्नान करके नए कपड़े पहनते हैं।
  3. कोलम, मंदिर दर्शन और पंचांगम पाठ (सुबह)
    दरवाज़े पर कोलम बनाया जाता है, परिवार मंदिर जाते हैं और नए साल का पंचांग पढ़ा जाता है, जिसे वे सुनते हैं।
  4. पुथांडु की दावत (दोपहर)
    दोपहर के भोजन में छह स्वादों के मेल वाली आम की पचड़ी के साथ वड़ा, पायसम और चावल के व्यंजन होते हैं।

भारत भर में तमिल नववर्ष (पुथांडु)

यही दिन भारत के कई हिस्सों में नववर्ष या वसंत का त्योहार है: केरल में विशु, पंजाब में बैसाखी, बंगाल में पोइला बोइशाख, असम में बोहाग बिहू और ओडिशा में पणा संक्रांति। उत्तराखंड में मेष संक्रांति को बिखौती या बिशु कहा जाता है, जब श्रद्धालु हरिद्वार में गंगा में पवित्र डुबकी लगाते हैं और कुमाऊँ में मेले लगते हैं, जैसे द्वाराहाट का स्याल्दे बिखौती मेला। देहरादून में रहने वाले तमिल परिवार घर पर कन्नी के साथ पुथांडु मनाते हैं और स्थानीय दक्षिण भारतीय मंदिरों में दर्शन करते हैं।

अन्य नाम और संबंधित त्योहार

  • चित्तिरै तिरुनाल
  • मेषादि
  • पुथांडु
  • वरुष पिरप्पु

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में तमिल नववर्ष (पुथांडु) कब है?

तमिल नववर्ष (पुथांडु) बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को है।

क्या तमिल नववर्ष (पुथांडु) पर बैंक बंद रहते हैं?

2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।

क्या तमिल नववर्ष (पुथांडु) केंद्र सरकार की छुट्टी है?

तमिल नववर्ष (पुथांडु) प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।

तमिल नववर्ष (पुथांडु) के अन्य नाम क्या हैं?

तमिल नववर्ष (पुथांडु) को चित्तिरै तिरुनाल, मेषादि, पुथांडु और वरुष पिरप्पु भी कहा जाता है।

तमिल नववर्ष 14 अप्रैल को क्यों होता है?

तमिल कैलेंडर सौर है, और इसका वर्ष तब शुरू होता है जब सूर्य निरयन मेष राशि में प्रवेश करता है। ऐसा हर साल 14 अप्रैल को या उसके आसपास होता है।

पुथांडु पर कन्नी क्या है?

कन्नी फलों, सोने, सिक्कों, फूलों और दर्पण से सजी थाली है, जो एक रात पहले तैयार की जाती है। परिवार नववर्ष की सुबह सबसे पहले इसे देखते हैं, जो समृद्ध वर्ष का संकेत माना जाता है।

तमिल नववर्ष पर आम की पचड़ी क्यों बनाई जाती है?

आम की पचड़ी में मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा और नमकीन स्वाद एक साथ होता है। यह याद दिलाती है कि आने वाला साल तरह-तरह के अनुभव लेकर आएगा।

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