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ढाकदुर्गा पूजा (महा सप्तमी) 2026 Durga Puja (Maha Saptami)

दुर्गा पूजा का पहला मुख्य दिन

रविवार, 18 अक्टूबर 2026

2027 में: बुधवार, 6 अक्टूबर 2027

महा सप्तमी दुर्गा पूजा का पहला मुख्य दिन है, जब भोर में कोला बोउ को स्नान कराया जाता है और पूर्वी भारत के पंडालों में देवी दुर्गा का विधिवत प्रतिमा में आवाहन किया जाता है।

तारीख कैसे तय होती है: शारदीय नवरात्रि के दौरान हिंदू माह आश्विन के शुक्ल पक्ष की सप्तमी (सातवीं तिथि)

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) क्यों मनाते हैं

महा सप्तमी दुर्गा पूजा के तीन मुख्य दिनों में पहला दिन है। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत का सबसे बड़ा त्योहार है। 2026 में यह रविवार, 18 अक्टूबर को है। पंडाल एक शाम पहले, षष्ठी से ही दर्शकों के लिए खुल जाते हैं, लेकिन देवी दुर्गा की पूर्ण पूजा सप्तमी को उन अनुष्ठानों से शुरू होती है जिनसे प्रतिमा में देवी की उपस्थिति का आवाहन किया जाता है।

दुर्गा पूजा भैंसे के रूप वाले असुर महिषासुर पर देवी की विजय का उत्सव है, यानी बुराई पर अच्छाई की जीत की कथा। बंगाल में इसका एक आत्मीय पारिवारिक अर्थ भी है। मान्यता है कि उमा कहलाने वाली दुर्गा हर साल कुछ दिनों के लिए अपने चार बच्चों के साथ मायके आती हैं, और सप्तमी वह दिन है जब लगता है कि बेटी सचमुच घर आ गई है।

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) का इतिहास और कथा

दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की कथा मार्कंडेय पुराण के अंश देवी माहात्म्य से आती है। जो देवता असुर को हरा नहीं पा रहे थे, उन्होंने अपनी शक्तियाँ मिलाकर देवी को प्रकट किया, और हर देवता ने उन्हें एक अस्त्र दिया। कृत्तिवास की बांग्ला रामायण में यह भी जुड़ता है कि रावण से युद्ध से पहले राम ने शरद ऋतु में दुर्गा की पूजा की थी। चूँकि यह सामान्य वसंत ऋतु से बाहर था, इसलिए शरद की इस पूजा को अकाल बोधन, यानी असमय जागरण, कहा जाता है।

बंगाल में भव्य पारिवारिक पूजाएँ कई सदियों पुरानी हैं और ज़मींदार व धनी घराने इनका आयोजन करते थे। सामुदायिक पूजाएँ, जिन्हें सार्वजनीन कहते हैं, बीसवीं सदी की शुरुआत में कोलकाता में आम हुईं। 2021 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया।

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) कैसे मनाते हैं

सप्तमी भोर से पहले कोला बोउ स्नान से शुरू होती है, जिसे नवपत्रिका स्नान भी कहते हैं। एक केले के पौधे को हल्दी, अरबी और धान समेत आठ दूसरे पौधों के साथ बाँधा जाता है और नदी या तालाब में स्नान कराया जाता है। फिर उसे नई दुल्हन की तरह लाल किनारी वाली साड़ी पहनाकर पंडाल में गणेश के बगल में रखा जाता है। ये नौ पौधे देवी के नौ रूपों के प्रतीक हैं और पूजा को फ़सल से जोड़ते हैं।

इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा होती है, जिससे भक्तों की नज़र में प्रतिमा में प्राण आ जाते हैं। फिर पुरोहित चंडी के मंत्रों और फूल, फल व भोग के अर्पण के साथ सप्तमी पूजा करते हैं। सुबह की पूजा के बाद भक्त पुष्पांजलि देते हैं, यानी पुरोहित के मंत्र दोहराते हुए जुड़े हाथों में फूल अर्पित करते हैं। शाम को धुनुची से आरती होती है; धुनुची नारियल के छिलके और धूप से भरे मिट्टी के पात्र होते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं, देर रात तक पंडाल घूमते हैं और खिचड़ी का भोग बाँटते हैं।

महत्वपूर्ण दिन और पल

  1. षष्ठी और बोधन (17 अक्टूबर 2026 की शाम)
    देवी का विधिवत जागरण होता है, प्रतिमा के मुख से आवरण हटाया जाता है और पंडाल दर्शकों के लिए खुल जाते हैं।
  2. कोला बोउ स्नान और सप्तमी पूजा (रविवार, 18 अक्टूबर 2026)
    भोर में नवपत्रिका को स्नान कराकर गणेश के बगल में रखा जाता है, जिसके बाद प्राण प्रतिष्ठा, पुष्पांजलि और शाम की आरती होती है।
  3. महा अष्टमी और संधि पूजा (19 अक्टूबर 2026)
    सबसे व्यस्त दिन, जब कई पंडालों में कुमारी पूजा होती है और अष्टमी व नवमी के संधि काल में 108 दीयों से संधि पूजा होती है।
  4. महा नवमी (20 अक्टूबर 2026)
    पूजा का अंतिम पूरा दिन, जो बड़े भोग और पंडालों में शाम के उत्सव के साथ पूरा होता है।
  5. विजयादशमी (21 अक्टूबर 2026)
    विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला खेलती हैं और प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में दशहरा मनाया जाता है।

भारत भर में दुर्गा पूजा (महा सप्तमी)

सप्तमी की रौनक सबसे ज़्यादा पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार और झारखंड में दिखती है। उत्तराखंड समेत उत्तर भारत में यही दिन नवरात्रि का सातवाँ दिन होता है, जब भक्त माँ कालरात्रि की पूजा करते हैं। देहरादून और उत्तर के दूसरे शहरों में बंगाली संगठन कोला बोउ के अनुष्ठानों और सांस्कृतिक संध्याओं के साथ पंडाल सजाते हैं।

दशहरा उत्सव के दिन (2026)

  1. दुर्गा पूजा (महा सप्तमी): रविवार, 18 अक्टूबर 2026
  2. दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी): सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
  3. महा नवमी: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
  4. दशहरा (मुख्य दिन)

अन्य नाम और संबंधित त्योहार

  • दुर्गा पूजा सप्तमी
  • दुर्गा सप्तमी
  • सप्तमी पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) कब है?

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को है।

क्या दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) पर बैंक बंद रहते हैं?

2026 में दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) के दिन रविवार है, जब बैंक वैसे भी बंद रहते हैं।

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) पर किन राज्यों में सरकारी दफ़्तर बंद रहते हैं?

2026 में दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) पर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में राज्य सरकार के दफ़्तर बंद रहते हैं। पूरी अवकाश सूची के लिए नीचे अपना राज्य चुनें।

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) किन राज्यों में प्रतिबंधित अवकाश है?

2026 में दिल्ली में दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित (वैकल्पिक) अवकाश है: कर्मचारी छुट्टी ले सकते हैं, पर दफ़्तर खुले रहते हैं।

क्या दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) केंद्र सरकार की छुट्टी है?

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।

क्या दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) पर शेयर बाज़ार बंद रहता है?

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) के दिन रविवार है, जब बाज़ार वैसे भी बंद रहते हैं।

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) के अन्य नाम क्या हैं?

दुर्गा पूजा (महा सप्तमी) को दुर्गा पूजा सप्तमी, दुर्गा सप्तमी और सप्तमी पूजा भी कहा जाता है।

कोला बोउ क्या है?

कोला बोउ केले के पौधे के साथ बँधे नौ पौधों का गुच्छा है, जिसे सप्तमी की भोर में स्नान कराकर दुल्हन की तरह सजाया जाता है। यह देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक है।

दुर्गा पूजा में सप्तमी का क्या महत्व है?

देवी की विधिवत पूजा सप्तमी को नवपत्रिका स्नान और प्राण प्रतिष्ठा से शुरू होती है। यह पूजा के तीन मुख्य दिनों में पहला दिन है।

नवरात्रि के सातवें दिन किस देवी की पूजा होती है?

उत्तर भारत की नवरात्रि में सातवाँ दिन माँ कालरात्रि को समर्पित है। वे दुर्गा का उग्र रूप हैं, जो अंधकार और भय का नाश करती हैं।

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