हिंदू · तमिलनाडु
पोंगल 2027 Pongal
तमिल फ़सल उत्सव
शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
चंद्र पंचांग: 14 जन 2027
शुक्ल पक्ष
माह: पौष (पूर्णिमांत, उत्तर भारत)
विक्रम संवत 2083 · शक संवत 1948
पोंगल चंद्रमा से नहीं, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से तय होता है, इसलिए इसकी तिथि हर साल बदलती है: 2026 में यह कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ा था, और 2027 में यह पौष के शुक्ल पक्ष में, अमावस्या के एक हफ़्ते बाद पड़ रहा है।
पोंगल तमिलनाडु का फ़सल उत्सव है, जिसमें सूर्य, धरती और खेती के मवेशियों का आभार जताया जाता है। यह तमिल माह थाई की शुरुआत में चार दिन तक मनाया जाता है।
तारीख कैसे तय होती है: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दिन से शुरू होता है, जो तमिल माह थाई का पहला दिन होता है; आमतौर पर 14 या 15 जनवरी

पोंगल: दिन-ब-दिन 2027
| दिन | 2027 | क्या होता है |
|---|---|---|
| भोगी | बुध, 13 जन | भोर से पहले पुरानी चीज़ों का अलाव; घरों की सफ़ाई और सजावट। |
| थाई पोंगल | गुरु, 14 जन | नए चावल को दूध में उफनने तक उबालकर सूर्य देव को भोग। |
| मट्टू पोंगल | शुक्र, 15 जन | मवेशियों को नहलाना, सजाना और पोंगल खिलाना; कुछ ज़िलों में जल्लीकट्टू। |
| काणुम पोंगल | शनि, 16 जन | परिवार से मिलना और घूमना; भाइयों की भलाई की प्रार्थना। |
पंचांग के अनुसार थाई पोंगल 14 जनवरी 2027 को है, जबकि केंद्र सरकार की अवकाश सूची में पोंगल 15 जनवरी को है, इसलिए स्थानीय छुट्टी के लिए अपने राज्य की सूची देखें।
पोंगल क्यों मनाते हैं
पोंगल आभार का त्योहार है। यह उस दिन शुरू होता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, यानी तमिल माह थाई के पहले दिन, और पंचांग के अनुसार 2027 में मुख्य दिन गुरुवार, 14 जनवरी को है। जनवरी के मध्य तक तमिलनाडु के किसान धान, गन्ना और हल्दी की फ़सल काट लेते हैं, और पोंगल इस फ़सल के लिए धन्यवाद कहने का समय है। प्रकाश और गर्मी के लिए सूर्य देव का, फ़सल के लिए वर्षा और मिट्टी का, और हल खींचने वाले बैलों और दूध देने वाली गायों का आभार माना जाता है।
"पोंगल" शब्द का अर्थ है "उबलकर छलक जाना"। मुख्य दिन पकाए जाने वाले मीठे चावल के व्यंजन को भी यही नाम दिया गया है। जब चावल और दूध से भरा बर्तन उफनकर किनारे से बाहर छलकता है, तो परिवार के लोग "पोंगलो पोंगल" पुकारते हैं। उफनता बर्तन समृद्धि का प्रतीक है, और परिवार कामना करते हैं कि नया साल घर में अन्न, सेहत और ख़ुशियों की ऐसी ही भरमार लाए।
यह त्योहार सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा, यानी उत्तरायण, की शुरुआत का भी प्रतीक है। हिंदू परंपरा में आगे के छह महीनों को वर्ष का शुभ आधा भाग माना जाता है, इसलिए तमिल घरों में कई शादियाँ और नए काम पोंगल के बाद तय किए जाते हैं। एक लोकप्रिय तमिल कहावत "थाई पिरंदाल वळि पिरक्कुम" का अर्थ है कि थाई के जन्म के साथ आगे का रास्ता खुलता है। लोग इसके ज़रिए यह उम्मीद जताते हैं कि नए महीने के साथ मुश्किलें आसान होंगी।
आज पोंगल तमिल पहचान का उत्सव भी है। कोलम कला, लोक संगीत, नए कपड़े और गाँव के खेल उन परिवारों को फिर से जोड़ते हैं जो अब अपने खेतों से दूर शहरों में रहते हैं।
पोंगल का इतिहास और कथा
पोंगल की जड़ें पुराने तमिल कृषि जीवन में हैं। संगम काल की कविताओं में युवतियों का वर्णन मिलता है, जो थाई महीने में व्रत रखती थीं, भोर में स्नान करती थीं और वर्षा तथा अच्छी फ़सल के लिए प्रार्थना करती थीं। विद्वान इस "थाई नीराडल" प्रथा को उस त्योहार से जोड़ते हैं जो आगे चलकर पोंगल बना। चोल काल के शिलालेखों में भी इसी समय होने वाले एक फ़सल भोज का उल्लेख है, जिससे पता चलता है कि यह उत्सव लंबे समय से लगातार मनाया जा रहा है।
इस त्योहार के बारे में कई कथाएँ कही जाती हैं। एक लोकप्रिय कथा मट्टू पोंगल को भगवान शिव और उनके नंदी बैल से जोड़ती है। कथा के अनुसार, शिव ने नंदी को लोगों से यह कहने भेजा कि वे रोज़ स्नान करें और महीने में एक बार भोजन करें। नंदी ने संदेश उलट दिया और कहा कि रोज़ भोजन करें और महीने में एक बार स्नान करें। तब शिव ने नंदी को धरती पर भेजा, ताकि वह किसानों को ज़्यादा ज़मीन जोतने में मदद करे और अतिरिक्त अन्न उग सके। यह कथा हँसी-मज़ाक के साथ सुनाई जाती है और बताती है कि पोंगल में मवेशियों को विशेष सम्मान क्यों मिलता है।
एक और मान्यता भोगी के दिन को वर्षा के देवता इंद्र से जोड़ती है। किसान खेतों को सींचने वाले मानसून के लिए इंद्र का आभार मानते हैं। कृष्ण परंपरा में यह कथा भी जुड़ती है कि कृष्ण ने एक बार गोकुल के ग्वालों से इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा था, और कई परिवारों के लिए इस मौसम के अलाव और गौ-पूजा उसी कथा की याद दिलाते हैं।
पोंगल कैसे मनाते हैं
तैयारियाँ कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं। घरों की सफ़ाई और पुताई होती है, और पुरानी या टूटी चीज़ें अलग कर दी जाती हैं। पहले दिन, जिसे भोगी कहते हैं, परिवार भोर से पहले अलाव जलाते हैं और बेकार चीज़ें उसमें डाल देते हैं। यह आग पुराने को पीछे छोड़कर नए के लिए जगह बनाने का प्रतीक है।
मुख्य दिन, थाई पोंगल, की शुरुआत सुबह जल्दी होती है। महिलाएँ प्रवेश द्वार पर चावल के आटे से बड़े कोलम बनाती हैं, अक्सर रंगीन पाउडर से और गन्ने, बर्तनों और सूर्य की आकृतियों के साथ। पोंगल का बर्तन आँगन में या खुले में चूल्हे पर पूर्व की ओर मुँह करके रखा जाता है। बर्तन की गर्दन पर हल्दी के ताज़े पौधे और अदरक के पत्ते बाँधे जाते हैं। उसी मौसम में कटे चावल को दूध में पकाया जाता है, और जब वह उफनता है तो परिवार के सब लोग एक साथ पुकारते हैं। कुछ घरों में गुड़, घी, इलायची और काजू से सक्करई पोंगल बनता है, जबकि कुछ घरों में मूँग दाल, काली मिर्च और जीरे से वेन पोंगल भी बनाया जाता है।
पहला हिस्सा गन्ने, केले, हल्दी और नारियल के साथ सूर्य को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। परिवार के लोग नए कपड़े पहनते हैं, मंदिर जाते हैं और पड़ोसियों के साथ भोजन बाँटते हैं।
तीसरे दिन, मट्टू पोंगल, को मवेशियों को नहलाया जाता है, उनके सींग रंगे जाते हैं और उन पर पीतल या रंगीन खोल चढ़ाए जाते हैं, और गले में घंटियाँ और मालाएँ बाँधी जाती हैं। उन्हें पोंगल और केले खिलाए जाते हैं और गाँव में घुमाया जाता है। मदुरै और आसपास के ज़िलों के कुछ हिस्सों में इन दिनों राज्य के तय नियमों के तहत बैलों को काबू करने का खेल जल्लीकट्टू होता है।
आख़िरी दिन, काणुम पोंगल, परिवार और दोस्तों से मिलने का दिन है। कई घरों में महिलाएँ अपने भाइयों की भलाई की प्रार्थना के रूप में हल्दी के पत्ते पर रंगीन चावल की छोटी-छोटी गोलियाँ रखती हैं। परिवार समुद्र तट, पार्क और नदी किनारे घूमने जाते हैं।
पोंगल के प्रतीक, पकवान और रीति-रिवाज
पोंगल का बर्तन इस त्योहार का मुख्य प्रतीक है। परिवार मिट्टी या पीतल का नया बर्तन लेते हैं, उस पर चंदन और कुमकुम लगाते हैं और उसकी गर्दन पर हल्दी और अदरक के ताज़े पौधे बाँधते हैं। बर्तन को खुले में लकड़ी या उपलों की आग पर उगते सूर्य की ओर रखा जाता है। जब दूध और चावल झाग बनकर किनारे से बाहर बहते हैं, तो परिवार "पोंगलो पोंगल" पुकारता है, और इस छलकने को इस बात का संकेत माना जाता है कि घर में भरपूर समृद्धि रहेगी।
दरवाज़े पर या बर्तन के पास गन्ने के डंठल जोड़ों में बाँधे जाते हैं, और केले का गुच्छा, नारियल और पान के पत्ते सूर्य देव को चढ़ाए जाने वाले भोग को पूरा करते हैं। प्रवेश द्वार पर बने कोलम में बर्तन, गन्ना, सूर्य और मवेशी दिखाए जाते हैं, और कई घरों में चारों दिन हर सुबह नया कोलम बनाया जाता है। दरवाज़ों पर तोरणम, यानी आम के पत्तों की लड़ियाँ, लगाई जाती हैं।
भोजन सादा और मौसमी होता है। नए चावल, गुड़, घी, इलायची और काजू से बना सक्करई पोंगल मुख्य व्यंजन है, और साथ में वेन पोंगल, वडै, पायसम और ताज़ी फ़सल की सब्ज़ियों से बना मिला-जुला कूटु पकाया जाता है। बच्चे दिन भर कच्चा गन्ना चूसते हैं। मट्टू पोंगल पर मवेशियों के सींग रंगे जाते हैं, उन्हें घंटियाँ और मालाएँ पहनाई जाती हैं, और सबसे पहले उन्हें ही वही मीठा पोंगल खिलाया जाता है।
भारत भर में पोंगल
यही सौर घटना पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान होता है और खिचड़ी व तिल के लड्डू बनते हैं, और पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी के अलाव जलते हैं। असम में माघ बिहू पर सामूहिक भोज होते हैं, गुजरात में उत्तरायण पर पतंगें उड़ती हैं, और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में भोगी और कनुमा के साथ तीन दिन की संक्रांति मनाई जाती है।
उत्तराखंड के कुमाऊँ में यह दिन उत्तरायणी या घुघुतिया कहलाता है। बच्चे मीठे घुघुतों की माला पहनते हैं और कौओं को बुलाकर उन्हें खिलाते हैं, और बागेश्वर में सरयू और गोमती के संगम पर लगने वाला उत्तरायणी मेला भारी भीड़ खींचता है। देहरादून में रहने वाले तमिल परिवार घर पर और शहर के दक्षिण भारतीय मंदिरों में पोंगल मनाते हैं।
पोंगल पर दफ़्तर, बैंक, बाज़ार और यात्रा
पोंगल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश है; 2027 की केंद्रीय सूची में यह शुक्रवार, 15 जनवरी को है, और उस दिन सर्वोच्च न्यायालय बंद रहेगा। 2027 की राज्य और बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं।
केंद्र सरकार की छुट्टियों की व्यवस्था में पोंगल का तय स्थान है। 2027 में केंद्र सरकार के दफ़्तरों के लिए जारी वैकल्पिक सूची और प्रतिबंधित अवकाश सूची, दोनों में पोंगल शुक्रवार, 15 जनवरी को है। उस दिन केंद्रीय दफ़्तर खुले रहते हैं, और कर्मचारी अपने प्रतिबंधित अवकाश कोटे से छुट्टी ले सकते हैं। भारत का सर्वोच्च न्यायालय 15 जनवरी 2027 को पोंगल के लिए बंद रहेगा। एम्स ऋषिकेश ने भी इसी तारीख़ को इसे प्रतिबंधित अवकाश के रूप में रखा है।
2027 की राज्य सरकारों की सूचियाँ और RBI की बैंक अवकाश सूची अभी जारी नहीं हुई हैं, इसलिए तमिलनाडु या किसी और राज्य में बैंक या दफ़्तर का काम तय करने से पहले जनवरी के क़रीब इन्हें देख लें।
अंदाज़े के लिए, 2026 की स्थिति ऐसी थी। 14 जनवरी 2026 को पोंगल केंद्रीय कर्मचारियों और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश था। केंद्रीय विद्यालयों, भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गढ़वाल विश्वविद्यालय और देहरादून के वाडिया संस्थान ने भी इसे प्रतिबंधित अवकाश रखा, और सर्वोच्च न्यायालय उस दिन बंद रहा।
चेन्नई और बेंगलुरु से तमिलनाडु के शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनें और बसें त्योहार से काफ़ी पहले भर जाती हैं, इसलिए टिकट जल्दी बुक करें। गन्ना, हल्दी के पौधे, मिट्टी के बर्तन और नए कपड़े बेचने वाले बाज़ार भोगी से कई दिन पहले तक भीड़ से भरे रहते हैं।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- मकर संक्रांति (तमिलनाडु)
- थाई पोंगल
- थाई तिरुनाल
- थाई पोंगल (तमिलनाडु में)
मकर संक्रांति 14 जन 2027
माघ बिहू 14 जन 2027
लोहड़ी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में पोंगल कब है?
पोंगल शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है।
क्या पोंगल पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या पोंगल केंद्र सरकार की छुट्टी है?
पोंगल वैकल्पिक छुट्टियों की सूची में है। हर राज्य की राजधानी में केंद्र सरकार कर्मचारी समन्वय समिति तय करती है कि उस राज्य में दफ़्तर इस दिन बंद रहेंगे या नहीं।
पोंगल के अन्य नाम क्या हैं?
पोंगल को मकर संक्रांति (तमिलनाडु), थाई पोंगल और थाई तिरुनाल भी कहा जाता है।
पोंगल क्यों मनाया जाता है?
पोंगल अच्छी फ़सल के लिए सूर्य, प्रकृति और खेती के पशुओं का आभार जताने का त्योहार है। यह तमिल माह थाई और सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा का भी स्वागत करता है, जिसे शुभ समय माना जाता है।
पोंगल शब्द का अर्थ क्या है?
पोंगल का अर्थ है उबलकर छलक जाना। मुख्य दिन पकने वाले चावल और दूध के व्यंजन को बर्तन से उफनने दिया जाता है, जिसे परिवार आने वाले साल में समृद्धि का संकेत मानते हैं।
पोंगल के चार दिन कौन से हैं?
चार दिन हैं भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और काणुम पोंगल। हर दिन का अपना भाव है: पुराने को हटाना, सूर्य की पूजा, मवेशियों का सम्मान और परिवार से मिलना।
क्या पोंगल और मकर संक्रांति एक ही हैं?
दोनों सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का उत्सव हैं। पोंगल इस त्योहार का तमिल रूप है, जबकि दूसरे राज्यों में इसे मकर संक्रांति, लोहड़ी, माघ बिहू, उत्तरायण या उत्तरायणी कहते हैं।
क्या 2027 में पोंगल की छुट्टी है?
15 जनवरी 2027 को पोंगल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश है, इसलिए केंद्रीय दफ़्तर खुले रहेंगे। उस दिन सर्वोच्च न्यायालय बंद रहेगा। राज्य और बैंक की छुट्टियों का पता 2027 की राज्य और RBI सूचियाँ जारी होने पर चलेगा।
अगले 30 दिनों के हिंदू त्योहार
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17 अक्टूशनि
दुर्गा पूजा
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18 अक्टूरवि
दुर्गा पूजा (महा सप्तमी)
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19 अक्टूसोम
दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)
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20 अक्टूमंगल
दशहरा
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20 अक्टूमंगल
महा नवमी
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25 अक्टूरवि
शरद पूर्णिमा
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26 अक्टूसोम
महर्षि वाल्मीकि जयंती
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29 अक्टूगुरु
करवा चौथ
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6 नवंशुक्र
धनतेरस
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8 नवंरवि
दिवाली
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8 नवंरवि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
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8 नवंरवि
लक्ष्मी पूजा
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9 नवंसोम
गोवर्धन पूजा
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11 नवंबुध
भाई दूज
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शुक्रवार, 2 अक्टूबर गांधी जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता और सत्य व अहिंसा की आवाज़ महात्मा गांधी की जयंती है। |
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रविवार, 11 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा का नौ रातों का शरद ऋतु का त्योहार है, जो घटस्थापना से शुरू होकर दशहरे तक चलता है। इसमें व्रत, पूजा-पाठ, गरबा और दुर्गा पूजा होती है। |
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शनिवार, 17 अक्टूबर दुर्गा पूजा दुर्गा पूजा महिषासुर राक्षस पर देवी दुर्गा की जीत का उत्सव है। भव्य पंडाल, ढाक की थाप, पूजा-अर्चना और भोज इसकी पहचान हैं, ख़ासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत... |
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मंगलवार, 20 अक्टूबर दशहरा दशहरा, यानी विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। |
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रविवार, 8 नवंबर दिवाली रोशनी का त्योहार दिवाली अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। कार्तिक की अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा होती है, दीयों की कतारें जलती हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं और... |
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रविवार, 15 नवंबर छठ पूजा छठ पूजा बिहार और पूर्वी भारत का चार दिन का त्योहार है, जिसमें व्रती उपवास रखते हैं और पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। |
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मंगलवार, 24 नवंबर गुरु नानक जयंती गुरु नानक जयंती, जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म का उत्सव है। इस दिन अरदास, नगर कीर्तन, लंगर होते हैं और गुरुद्वा... |
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सार्वजनिक छुट्टी प्रमुख त्योहार आज
- शनि, 17 अक्टू
दुर्गा पूजा
- मंगल, 20 अक्टू
दशहरा
- रवि, 8 नवं
दिवाली
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गुरु नानक जयंती