हिंदू
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 2026 Naraka Chaturdashi (Choti Diwali)
छोटी दिवाली
रविवार, 8 नवंबर 2026
2027 में: गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027
नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं, नरकासुर पर भगवान कृष्ण की विजय की याद दिलाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल स्नान होता है, यमराज के लिए दीया जलाया जाता है और दिवाली के पहले दीये जगमगाते हैं।
तारीख कैसे तय होती है: उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में कार्तिक के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (14वाँ दिन) (अमांत पंचांग में आश्विन), आम तौर पर दिवाली की अमावस्या से एक दिन पहले
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) क्यों मनाते हैं
नरक चतुर्दशी पाँच दिन के दिवाली उत्सव का दूसरा दिन है। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली के नाम से ज़्यादा जाना जाता है, और पश्चिम भारत में रूप चौदस या काली चौदस के नाम से। यह असुर राजा नरकासुर की हार का उत्सव है और जीवन व घर से अंधकार, गंदगी और बुराई को दूर करने का प्रतीक है।
यह दिन स्वच्छता और सेहत से गहराई से जुड़ा है। भक्त मानते हैं कि इस दिन सूर्योदय से पहले जड़ी-बूटियों के उबटन के साथ तेल स्नान करने से व्यक्ति पाप से और नरक के भय से मुक्त होता है, "नरक" शब्द का यही अर्थ है। शाम को मृत्यु के देवता यमराज के लिए जलाया गया दीया परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने के लिए होता है।
2026 में यह त्योहार रविवार, 8 नवंबर को है। इस साल चतुर्दशी और अमावस्या तिथियाँ इतनी पास हैं कि कई पंचांग नरक चतुर्दशी के सुबह के स्नान और शाम की लक्ष्मी पूजा को एक ही तारीख़ पर रखते हैं। कुछ क्षेत्रीय पंचांग दोनों को एक दिन के अंतर पर दिखाते हैं, इसलिए परिवार आम तौर पर अपने पुरोहित या स्थानीय पंचांग का पालन करते हैं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) का इतिहास और कथा
मुख्य कथा भागवत पुराण और दूसरे पुराणों में मिलती है। नरकासुर एक शक्तिशाली असुर था, जो प्राग्ज्योतिषपुर पर राज करता था, जिसे परंपरा आज के असम में मानती है। सत्ता के नशे में उसने स्वर्ग पर हमला किया, देवताओं की माता अदिति के कुंडल छीन लिए और सोलह हज़ार स्त्रियों को बंदी बना लिया। भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर सवार होकर उससे लड़ने निकले। भयंकर युद्ध के बाद असुर का वध हुआ। कई कथाओं में अंतिम प्रहार सत्यभामा करती हैं, क्योंकि एक वरदान के अनुसार नरकासुर केवल अपनी माता के हाथों मर सकता था, और सत्यभामा को भूदेवी का रूप माना जाता है, वह पृथ्वी देवी जिन्होंने उसे जन्म दिया था।
कहा जाता है कि मरते समय नरकासुर ने माँगा कि उसकी मृत्यु को शोक के बजाय दीयों और खुशी के साथ मनाया जाए। कृष्ण भोर में लौटे और युद्ध की धूल-मिट्टी धोने के लिए तेल से स्नान किया, इसीलिए सूर्योदय से पहले का तेल स्नान इस त्योहार का केंद्र बन गया। उन्होंने बंदी स्त्रियों को भी मुक्त किया और उनके सम्मान की रक्षा के लिए उन्हें अपनी रानियों के रूप में स्वीकार किया।
दूसरी परंपरा इस दिन को यमराज से जोड़ती है। कई पौराणिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस रात यमराज को अर्पित दीया घर को अकाल मृत्यु से बचाता है। बंगाल में यह रात पूर्वजों और देवी काली से जुड़ी है, जिनकी पूजा अमावस्या को होती है। उत्तर भारत की कुछ परंपराओं में इसी तिथि को हनुमान जयंती भी मनाई जाती है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) कैसे मनाते हैं
दिन की शुरुआत सूर्योदय से काफ़ी पहले अभ्यंग स्नान से होती है। परिवार के लोग शरीर पर तिल के तेल की मालिश करते हैं और फिर नहाने से पहले बेसन, हल्दी, चंदन और जड़ी-बूटियों से बना उबटन लगाते हैं। महाराष्ट्र में लोग नहाने से पहले कारीट नाम के एक छोटे कड़वे फल को पैर से कुचलते हैं, जो नरकासुर को कुचलने का प्रतीक है। कुछ परिवार नहाते समय अपामार्ग नाम की जंगली बूटी की टहनी को शरीर से छुआने की पुरानी परंपरा भी निभाते हैं।
नहाने के बाद लोग नए या धुले हुए कपड़े पहनते हैं और कृष्ण, काली या हनुमान के मंदिरों में दर्शन करते हैं। घरों की आख़िरी सफ़ाई होती है और प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। उत्तर भारत के कई घरों में अँधेरा होने के बाद यमराज के लिए चौमुखा दीया जलाकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है, जो यमराज की दिशा मानी जाती है, हालाँकि कुछ परिवार इसे धनतेरस पर जलाते हैं। मुख्य दिवाली की रात की तैयारी के रूप में घर के चारों ओर मिट्टी के दीयों की कतारें जलाई जाती हैं।
खान-पान और रीति-रिवाज अलग-अलग हैं। उत्तर भारत की रसोइयों में दिवाली के लिए मिठाइयाँ और नमकीन बनते हैं। कई घरों में महिलाएँ इस दिन सौंदर्य से जुड़े अनुष्ठान करती हैं, इसीलिए राजस्थान और गुजरात में रूप चौदस, यानी रूप का दिन, नाम लोकप्रिय है। शाम को छोटे पटाखे और फुलझड़ियाँ आम हैं, हालाँकि वायु प्रदूषण के कारण अब कई शहर इन पर रोक लगाते हैं।
महत्वपूर्ण दिन और पल
- अभ्यंग स्नान (सूर्योदय से पहले, रविवार, 8 नवंबर 2026)
तेल मालिश और उबटन के बाद स्नान किया जाता है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह पाप धो देता है और नरकासुर पर कृष्ण की विजय का प्रतीक है। - नरकासुर पुतला दहन (भोर से पहले, गोवा)
स्थानीय युवाओं द्वारा काग़ज़ और पुआल से बनाए गए असुर के बड़े पुतले गलियों और गाँव के चौकों में जलाए जाते हैं। - यम दीपम (सूर्यास्त के बाद)
परिवार की लंबी उम्र के लिए यमराज से प्रार्थना के रूप में चौमुखा दीया घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। - लक्ष्मी पूजा (कई पंचांगों में 8 नवंबर 2026 की शाम)
2026 में कई पंचांग दिवाली की मुख्य पूजा इसी तारीख़ को बताते हैं, इसलिए छोटी दिवाली के दीयों के साथ ही लक्ष्मी पूजा शुरू हो जाती है।
भारत भर में नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में नरक चतुर्दशी ही मुख्य दीपावली का दिन है। तमिल परिवार गंगा स्नानम तेल स्नान के लिए भोर से पहले उठते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, सुबह-सुबह पटाखे फोड़ते हैं और अधिरसम और मुरुक्कु जैसी मिठाइयाँ बाँटते हैं। दोस्त एक-दूसरे से "गंगा स्नानम आच्चा?" पूछकर बधाई देते हैं, जिसका अर्थ है "क्या आपने पवित्र स्नान कर लिया?"
गोवा में गाँव और शहर के मोहल्ले काग़ज़ और पुआल से नरकासुर के ऊँचे पुतले बनाते हैं और भोर से पहले उन्हें जलाते हैं। बंगाल में यह दिन भूत चतुर्दशी है। परिवार चौदह पीढ़ियों के पूर्वजों की याद में चौदह दीये जलाते हैं और चौदह तरह के पत्तेदार साग का व्यंजन खाते हैं। गुजरात में काली चौदस रक्षा के लिए हनुमान और काली की पूजा का दिन है।
उत्तराखंड और बाक़ी उत्तर भारत में यह दिन बस छोटी दिवाली है। देहरादून में बाज़ार देर रात तक भरे रहते हैं क्योंकि परिवार त्योहार की ख़रीदारी पूरी करते हैं, और घरों में दीयों की पहली कतारें जलती हैं।
दिवाली उत्सव के दिन (2026)
धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): रविवार, 8 नवंबर 2026
लक्ष्मी पूजा: रविवार, 8 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा: सोमवार, 9 नवंबर 2026
भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर 2026
दिवाली (मुख्य दिन)
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- भूत चतुर्दशी
- छोटी दिवाली
- काली चौदस
- नरक चतुर्दशी
- रूप चौदस
धनतेरस 6 नवं 2026
लक्ष्मी पूजा 8 नवं 2026
गोवर्धन पूजा 9 नवं 2026
दिवाली 8 नवं 2026
भाई दूज 11 नवं 2026
इगास-बग्वाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) कब है?
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।
क्या नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पर बैंक बंद रहते हैं?
2026 में नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के दिन रविवार है, जब बैंक वैसे भी बंद रहते हैं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) किन राज्यों में प्रतिबंधित अवकाश है?
2026 में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना में नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित (वैकल्पिक) अवकाश है: कर्मचारी छुट्टी ले सकते हैं, पर दफ़्तर खुले रहते हैं।
क्या नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) केंद्र सरकार की छुट्टी है?
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।
क्या नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पर शेयर बाज़ार बंद रहता है?
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के दिन रविवार है, जब बाज़ार वैसे भी बंद रहते हैं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के अन्य नाम क्या हैं?
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) को भूत चतुर्दशी, छोटी दिवाली, काली चौदस, नरक चतुर्दशी और रूप चौदस भी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?
यह असुर नरकासुर पर भगवान कृष्ण और सत्यभामा की विजय का उत्सव है। यह दिन मुख्य दिवाली की रात से पहले बुराई और अशुद्धि को दूर करने का प्रतीक है।
नरक चतुर्दशी पर तेल स्नान क्यों किया जाता है?
परंपरा के अनुसार नरकासुर का वध करने के बाद कृष्ण ने भोर में तेल स्नान किया था। भक्त मानते हैं कि सूर्योदय से पहले तेल और उबटन से स्नान तन और मन को शुद्ध करता है और पाप से मुक्त करता है।
क्या छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी एक ही हैं?
हाँ। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली कहते हैं, जबकि दूसरे क्षेत्रों में इसे रूप चौदस, काली चौदस और भूत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
क्या 2026 में नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन हैं?
कई पंचांग दोनों को रविवार, 8 नवंबर 2026 को दिखाते हैं, सुबह तेल स्नान और शाम को लक्ष्मी पूजा। कुछ क्षेत्रीय पंचांगों में एक दिन का अंतर है, इसलिए अपना स्थानीय पंचांग देखें।
अगले 30 दिनों के हिंदू त्योहार
-
17 अक्टूशनि
दुर्गा पूजा
-
18 अक्टूरवि
दुर्गा पूजा (महा सप्तमी)
-
19 अक्टूसोम
दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)
-
20 अक्टूमंगल
दशहरा
-
20 अक्टूमंगल
महा नवमी
-
25 अक्टूरवि
शरद पूर्णिमा
-
26 अक्टूसोम
महर्षि वाल्मीकि जयंती
-
29 अक्टूगुरु
करवा चौथ
-
6 नवंशुक्र
धनतेरस
-
8 नवंरवि
दिवाली
-
8 नवंरवि
लक्ष्मी पूजा
-
9 नवंसोम
गोवर्धन पूजा
-
11 नवंबुध
भाई दूज
प्रमुख हिंदू त्योहार
केंद्र सरकार की आने वाली छुट्टियाँ
आपके राज्य की छुट्टियाँ
बैंक, राज्य सरकार और स्कूलों की छुट्टियाँ हर राज्य में अलग होती हैं। अपना राज्य चुनें:
छुट्टियों और त्योहारों का कैलेंडर: अक्टूबर और नवंबर 2026
पूरे भारत के लिए केंद्र सरकार की छुट्टियाँ और प्रमुख त्योहार। बैंक, राज्य सरकार और स्कूलों की छुट्टियों के लिए अपना राज्य खोलें: असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश.
| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2
शुक्रवार, 2 अक्टूबर गांधी जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता और सत्य व अहिंसा की आवाज़ महात्मा गांधी की जयंती है। |
3 | 4 | |||
| 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11
रविवार, 11 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा का नौ रातों का शरद ऋतु का त्योहार है, जो घटस्थापना से शुरू होकर दशहरे तक चलता है। इसमें व्रत, पूजा-पाठ, गरबा और दुर्गा पूजा होती है। |
| 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17
शनिवार, 17 अक्टूबर दुर्गा पूजा दुर्गा पूजा महिषासुर राक्षस पर देवी दुर्गा की जीत का उत्सव है। भव्य पंडाल, ढाक की थाप, पूजा-अर्चना और भोज इसकी पहचान हैं, ख़ासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत... |
18 |
| 19 | 20
मंगलवार, 20 अक्टूबर दशहरा दशहरा, यानी विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। |
21 | 22 | 23 | 24 | 25 |
| 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 |
| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ||||||
| 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8
रविवार, 8 नवंबर दिवाली रोशनी का त्योहार दिवाली अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। कार्तिक की अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा होती है, दीयों की कतारें जलती हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं और... |
| 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15
रविवार, 15 नवंबर छठ पूजा छठ पूजा बिहार और पूर्वी भारत का चार दिन का त्योहार है, जिसमें व्रती उपवास रखते हैं और पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। |
| 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
| 23 | 24
मंगलवार, 24 नवंबर गुरु नानक जयंती गुरु नानक जयंती, जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म का उत्सव है। इस दिन अरदास, नगर कीर्तन, लंगर होते हैं और गुरुद्वा... |
25 | 26 | 27 | 28 | 29 |
| 30 |
सार्वजनिक छुट्टी प्रमुख त्योहार आज
- शनि, 17 अक्टू
दुर्गा पूजा
- मंगल, 20 अक्टू
दशहरा
- रवि, 8 नवं
दिवाली
- रवि, 15 नवं
छठ पूजा
- मंगल, 24 नवं
गुरु नानक जयंती