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ज्योतगुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस 2026 Guru Tegh Bahadur Martyrdom Day

नौवें सिख गुरु का शहीदी दिवस

मंगलवार, 24 नवंबर 2026

2027 में: बुधवार, 24 नवंबर 2027

इस दिन सिख नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को याद करते हैं, जिन्होंने 1675 में दिल्ली में धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन दे दिया।

तारीख कैसे तय होती है: नानकशाही कैलेंडर में 24 नवंबर; परंपरागत रूप से चंद्र पंचांग में मघर (मार्गशीर्ष) के शुक्ल पक्ष की पंचमी

पुरानी दिल्ली की एक गली में शांत भोर, सफ़ेद गुरुद्वारा और निशान साहिब, सामने एक बड़ा जलता दीपक और पीछे से दिखते हाथ जोड़े श्रद्धालु, जबकि सफ़ेद पंखुड़ियाँ धीरे-धीरे गिर रही हैं।
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गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस क्यों मनाते हैं

यह दिन नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का दिन है, जिन्हें 1675 में दिल्ली में मृत्युदंड दिया गया। सिख उन्हें हिंद दी चादर, यानी भारत की ढाल, के रूप में याद करते हैं, क्योंकि उन्होंने दूसरे धर्म के लोगों के अपना धर्म मानने के अधिकार की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अंतरात्मा की स्वतंत्रता के लिए सबसे मज़बूत खड़े होने के उदाहरणों में से एक माना जाता है।

यह दिन उत्सव का नहीं, बल्कि स्मरण का है। सिख उनके साहस, ईश्वर की इच्छा (भाणा) को शांति से स्वीकार करने और उनकी इस शिक्षा को याद करते हैं कि मनुष्य को न किसी को डराना चाहिए और न किसी से डरकर जीना चाहिए।

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस का इतिहास और कथा

1621 में अमृतसर में त्याग मल के नाम से जन्मे वे गुरु हरगोबिंद जी के सबसे छोटे पुत्र थे। सिख परंपरा के अनुसार किशोर अवस्था में ही मुग़ल सेना के विरुद्ध एक युद्ध में दिखाए साहस के कारण उन्हें तेग बहादुर, यानी तलवार के धनी, नाम मिला। 1664 में बकाला में वे गुरु बने और बाद में उन्होंने चक्क नानकी नगर बसाया, जो आगे चलकर आनंदपुर साहिब बना। उन्होंने पूर्व में असम और ढाका तक लंबी यात्राएँ कीं, और इन्हीं यात्राओं के दौरान पटना में उनके पुत्र, भावी गुरु गोबिंद सिंह जी, का जन्म हुआ। उनकी बाणी गुरु ग्रंथ साहिब का हिस्सा है।

1675 में कश्मीरी पंडितों का एक दल आनंदपुर आया और उन्हें बताया कि बादशाह औरंगज़ेब के शासन में उन पर धर्म बदलने का दबाव डाला जा रहा है। गुरु जी ने स्वयं इस नीति को चुनौती देने का निर्णय लिया। उन्हें गिरफ़्तार करके दिल्ली लाया गया, और सिख परंपरा के अनुसार उनसे कहा गया कि वे इस्लाम स्वीकार करें या कोई चमत्कार दिखाएँ। उन्होंने दोनों से इनकार कर दिया। उनके साथी भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला को उनके सामने मार दिया गया, और गुरु जी का चाँदनी चौक में शीश काट दिया गया। भाई जैता उनका शीश आनंदपुर साहिब ले गए, जबकि लखी शाह वणजारा उनका धड़ ले गए और अपने ही घर में आग लगाकर उसका अंतिम संस्कार किया। दिल्ली में गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब इन्हीं स्थानों पर बने हैं। 2025 में देश ने उनकी शहादत की 350वीं वर्षगाँठ मनाई।

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस कैसे मनाते हैं

गुरुद्वारों में अखंड पाठ होता है, यानी गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार पाठ, जो शहीदी दिवस पर संपन्न होता है। रागी उनकी बाणी का कीर्तन करते हैं, और प्रचारक उनके और उनके साथियों के बलिदान की कथा सुनाते हैं। कई गुरुद्वारे उनकी याद में नगर कीर्तन, सभी आगंतुकों के लिए लंगर, रक्तदान शिविर और चिकित्सा शिविर आयोजित करते हैं। स्कूल और सिख संस्थाएँ धार्मिक स्वतंत्रता पर व्याख्यान आयोजित करती हैं।

महत्वपूर्ण दिन और पल

  1. अखंड पाठ का भोग (मंगलवार, 24 नवंबर 2026)
    गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार पाठ संपन्न होता है, जिसके बाद अरदास और कीर्तन होता है।
  2. नगर कीर्तन (उसी दिन या उससे पहले)
    पंज प्यारों की अगुवाई में एक जुलूस कीर्तन और गतका प्रदर्शन के साथ गुरु ग्रंथ साहिब को गलियों से ले जाता है।
  3. लंगर और सेवा (पूरे दिन)
    गुरुद्वारे सभी को मुफ़्त भोजन कराते हैं और कई गुरुद्वारे गुरु जी की याद में रक्तदान और स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं।

भारत भर में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस

सबसे बड़े जमावड़े दिल्ली के गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में और आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारा शीश गंज साहिब में होते हैं, जहाँ उनके शीश का अंतिम संस्कार हुआ था। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में यह दिन सबसे ज़्यादा दिखाई देता है। उत्तराखंड में देहरादून, ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार के सिख समुदाय स्थानीय गुरुद्वारों में कीर्तन और लंगर के साथ यह दिन मनाते हैं। चूँकि कुछ सिख संस्थाएँ चंद्र तिथि का पालन करती हैं, इसलिए किसी साल यह दिन 24 नवंबर से अलग दिन भी पड़ सकता है।

अन्य नाम और संबंधित त्योहार

  • गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस
  • गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी पर्व

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस कब है?

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है।

क्या गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर बैंक बंद रहते हैं?

2026 में यहाँ शामिल किसी भी राज्य में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस बैंक अवकाश नहीं है, इसलिए बैंक खुले रहते हैं, जब तक उस दिन रविवार या दूसरा या चौथा शनिवार न हो।

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर किन राज्यों में सरकारी दफ़्तर बंद रहते हैं?

2026 में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब में राज्य सरकार के दफ़्तर बंद रहते हैं। पूरी अवकाश सूची के लिए नीचे अपना राज्य चुनें।

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस किन राज्यों में प्रतिबंधित अवकाश है?

2026 में दिल्ली, असम, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित (वैकल्पिक) अवकाश है: कर्मचारी छुट्टी ले सकते हैं, पर दफ़्तर खुले रहते हैं।

क्या गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस केंद्र सरकार की छुट्टी है?

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।

क्या गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस पर शेयर बाज़ार बंद रहता है?

नहीं। 2026 में गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस NSE और BSE का ट्रेडिंग अवकाश नहीं है।

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस के अन्य नाम क्या हैं?

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस को गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस और गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी पर्व भी कहा जाता है।

गुरु तेग बहादुर कौन थे?

वे नौवें सिख गुरु थे, जिनका जन्म 1621 में अमृतसर में हुआ। उन्होंने आनंदपुर साहिब बसाया, और उनकी बाणी गुरु ग्रंथ साहिब का हिस्सा है।

गुरु तेग बहादुर को हिंद दी चादर क्यों कहा जाता है?

उन्होंने उन कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए, जिन पर धर्म बदलने का दबाव डाला जा रहा था। इसी कारण उन्हें भारत की ढाल के रूप में सम्मान दिया जाता है।

गुरु तेग बहादुर की शहादत कहाँ हुई?

1675 में दिल्ली के चाँदनी चौक में उनका शीश काटा गया। आज उस स्थान पर गुरुद्वारा शीश गंज साहिब है।

उनके शहीदी दिवस की तारीख़ कभी-कभी अलग क्यों होती है?

कई सिख संस्थाएँ नानकशाही कैलेंडर की तारीख़ 24 नवंबर का पालन करती हैं। दूसरी संस्थाएँ परंपरागत चंद्र तिथि मानती हैं, जो हर साल बदलती है।

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अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026

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