हिंदू
चेटी चंड 2027 Cheti Chand
सिंधी नववर्ष और झूलेलाल जयंती
बुधवार, 7 अप्रैल 2027
चेटी चंड सिंधी नववर्ष और सिंधी हिंदुओं के आराध्य संत झूलेलाल की जयंती है, जिसे नदियों और झीलों तक शोभा यात्राओं के साथ मनाया जाता है।
तारीख कैसे तय होती है: चैत्र (चेत) के शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन, जब नए महीने का पहला चाँद दिखाई देता है
चेटी चंड क्यों मनाते हैं
सिंधी समुदाय के लिए चेटी चंड नए साल की शुरुआत है और झूलेलाल के सम्मान का दिन है, जिन्हें श्रद्धालु जल के देवता वरुण का रूप मानते हैं। सिंधी पहचान के केंद्र में जल है, क्योंकि यह समुदाय सिंधु नदी के किनारे पनपा और बहुत से परिवार नदियों और समुद्र के रास्ते व्यापार करके जीते थे। इस दिन की प्रार्थनाओं में सुरक्षा, समृद्धि और धर्म की रक्षा की कामना की जाती है।
1947 में बँटवारे के बाद ज़्यादातर सिंधी हिंदुओं ने अपनी जन्मभूमि छोड़ दी और बहुत कम साधनों के साथ पूरे भारत में फिर से बसे। चेटी चंड बिखरे हुए समुदाय को जोड़े रखने, सिंधी भाषा और रीति-रिवाजों को ज़िंदा रखने और सिंध से दूर पैदा हुए बच्चों तक उन्हें पहुँचाने का ज़रिया बन गया।
चेटी चंड का इतिहास और कथा
यह नाम "चेत" से आया है, जो चैत्र का सिंधी रूप है, और "चंड" यानी चाँद से। यह त्योहार तब आता है जब नए महीने का पहला अर्धचंद्र दिखाई देता है।
झूलेलाल की कथा सिंध के ठट्टा नगर की है। मिरखशाह नाम के एक शासक ने हिंदुओं को अपना धर्म छोड़ने का आदेश दिया। परंपरा के अनुसार लोगों ने सिंधु नदी के तट पर प्रार्थना की और उन्हें दिव्य वचन सुनाई दिया कि एक उद्धारक जन्म लेगा। नसरपुर में रतनचंद और देवकी के घर एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम उडेरो लाल रखा गया। बड़े होकर उन्होंने शासक को चुनौती दी, श्रद्धालुओं के अनुसार चमत्कारी शक्तियाँ दिखाईं, और उसे सबको अपना-अपना धर्म मानने देने के लिए राज़ी कर लिया। अनुयायी उन्हें झूलेलाल, दरिया लाल और लाल साईं कहते हैं, और सिंध के मुसलमान इसी व्यक्तित्व का ज़िंदा पीर के रूप में सम्मान करते हैं। उनकी मुख्य दरगाह सिंध के उडेरो लाल गाँव में है।
चेटी चंड कैसे मनाते हैं
परिवार सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और झूलेलाल मंदिर जाते हैं। मुख्य अनुष्ठान बहराणा साहिब है, एक सजी हुई थाली, जिसमें गेहूँ के आटे का दीया, चीनी, इलायची, फल, कलश पर रखा नारियल, फूल और झूलेलाल की छवि होती है। श्रद्धालु इसे पारंपरिक छेज नृत्य करते और गाते हुए शोभा यात्रा में नदी, झील या समुद्र तक ले जाते हैं और जल को अर्पित करते हैं। पूरी शोभा यात्रा में "आयो लाल, झूलेलाल" का जयकारा गूँजता है।
घर पर लोग ताहिरी नाम के मीठे केसरिया चावल और साई भाजी बनाते हैं, और उबले चनों का प्रसाद बाँटते हैं। व्यापारी नए बही-खाते शुरू करते हैं, और बहुत से परिवार ज़रूरतमंदों को खाना और कपड़े देते हैं।
महत्वपूर्ण दिन और पल
- मंदिर दर्शन (19 मार्च 2026 (गुरुवार) की सुबह)
परिवार प्रार्थना के लिए झूलेलाल मंदिरों में जाते हैं और नए साल के लिए आशीर्वाद माँगते हैं। - बहराणा साहिब की शोभा यात्रा (दोपहर से शाम तक)
सजी हुई भोग की थाली को संगीत और छेज नृत्य के साथ नदी, झील या समुद्र तक ले जाकर जल को अर्पित किया जाता है। - सामुदायिक लंगर और मेला (पूरे दिन)
सिंधी संस्थाएँ मुफ़्त भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सिंधी व्यंजनों की दुकानें लगाती हैं।
भारत भर में चेटी चंड
सबसे बड़े उत्सव उन जगहों पर होते हैं जहाँ बँटवारे के बाद सिंधी परिवार बसे: महाराष्ट्र में उल्हासनगर और मुंबई, गुजरात में अहमदाबाद और आदिपुर-गांधीधाम, राजस्थान में जयपुर और अजमेर, मध्य प्रदेश में भोपाल और इंदौर, रायपुर और दिल्ली। उल्हासनगर में भारत की कुछ सबसे बड़ी शोभा यात्राएँ निकलती हैं। देहरादून समेत छोटे सिंधी समुदाय स्थानीय मंदिरों और सामुदायिक भवनों में जुटते हैं।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- झूलेलाल जयंती
- सिंधी नववर्ष
- उडेरोलाल जयंती
चैत्र शुक्लादि / नव संवत्सर 7 अप्रैल 2027
गुड़ी पड़वा 7 अप्रैल 2027
उगादि 7 अप्रैल 2027
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में चेटी चंड कब है?
चेटी चंड बुधवार, 7 अप्रैल 2027 को है।
क्या चेटी चंड पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या चेटी चंड केंद्र सरकार की छुट्टी है?
चेटी चंड वैकल्पिक छुट्टियों की सूची में है। हर राज्य की राजधानी में केंद्र सरकार कर्मचारी समन्वय समिति तय करती है कि उस राज्य में दफ़्तर इस दिन बंद रहेंगे या नहीं।
चेटी चंड के अन्य नाम क्या हैं?
चेटी चंड को झूलेलाल जयंती, सिंधी नववर्ष और उडेरोलाल जयंती भी कहा जाता है।
चेटी चंड क्या है?
यह सिंधी नववर्ष है, जो चेत महीने की शुरुआत में आता है। यह झूलेलाल की जयंती भी है।
झूलेलाल कौन हैं?
झूलेलाल सिंधी हिंदुओं के आराध्य संत हैं, जिन्हें श्रद्धालु जल के देवता वरुण का रूप मानते हैं। परंपरा के अनुसार उन्होंने सिंध के लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाया।
बहराणा साहिब क्या है?
यह आटे के दीये, चीनी, फल, नारियल और फूलों से सजा भोग है। श्रद्धालु इसे शोभा यात्रा में ले जाते हैं और बहते जल को अर्पित करते हैं।
अगले 30 दिनों के हिंदू त्योहार
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17 अक्टूशनि
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20 अक्टूमंगल
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धनतेरस
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8 नवंरवि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
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8 नवंरवि
लक्ष्मी पूजा
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