राष्ट्रीय

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तिरंगागणतंत्र दिवस 2027 Republic Day

भारत का संविधान लागू होने का दिन

मंगलवार, 26 जनवरी 2027

गणतंत्र दिवस उस दिन की याद है जब 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष वाला संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

तारीख कैसे तय होती है: तय तारीख़: हर साल 26 जनवरी

सर्दियों की सुबह ऊँचे खंभे पर लहराता भारतीय तिरंगा, पीछे बलुआ पत्थर का युद्ध स्मारक मेहराब और एक समारोह मार्ग, जिस पर लाल, सफ़ेद और जैतूनी वर्दियों में टुकड़ियाँ मार्च कर रही हैं, मोर और रथ के पहिये वाली एक झाँकी, और केसरिया, सफ़ेद और हरा धुआँ छोड़ते तीन जेट विमान।
गणतंत्र दिवस: परेड मार्च करती हुई गुज़रती है और जेट विमान आसमान को तिरंगे के रंगों में रंग देते हैं ICC Holidays, मौलिक चित्र, अपना काम, श्रेय के साथ दोबारा उपयोग के लिए मुक्त

गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं

26 जनवरी 1950 को भारत ब्रिटिश ताज के अधीन डोमिनियन नहीं रहा और अपने संविधान के तहत ख़ुद अपना शासन चलाने लगा। उस सुबह से राष्ट्राध्यक्ष लंदन में बैठा कोई राजा नहीं, बल्कि एक निर्वाचित राष्ट्रपति था। गणतंत्र दिवस इसी बदलाव का उत्सव है। यह इस विचार का सम्मान करता है कि भारत में सत्ता जनता से आती है और क़ानून की नज़र में हर नागरिक बराबर है।

स्वतंत्रता दिवस हमें विदेशी शासन से मिली आज़ादी की याद दिलाता है। गणतंत्र दिवस हमें उन नियमों की याद दिलाता है जिन्हें हमने उस आज़ादी के बाद जीने के लिए चुना। संविधान हर नागरिक को मौलिक अधिकार देता है, जैसे समानता, बोलने की आज़ादी और धर्म की आज़ादी। इसमें मौलिक कर्तव्य भी लिखे हैं, जैसे राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना। स्कूल, दफ़्तर और हाउसिंग सोसाइटियाँ इस दिन प्रस्तावना का सामूहिक पाठ करती हैं और इन अधिकारों और कर्तव्यों पर बात करती हैं।

यह दिन राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन भी है। हर राज्य के सैनिक, किसान, कलाकार और बच्चे नई दिल्ली के समारोह में हिस्सा लेते हैं। परेड भारत की रक्षा शक्ति दिखाती है, लेकिन साथ ही देश की भाषाएँ, नृत्य, शिल्प और वैज्ञानिक प्रगति भी दिखाती है। कई परिवारों के लिए सुबह टीवी पर परेड देखना हर साल की परंपरा है।

गणतंत्र दिवस का इतिहास और कथा

इस तारीख़ के चुनाव की कहानी 1950 से बीस साल पहले शुरू होती है। दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज, यानी पूरी तरह स्वशासन की माँग का प्रस्ताव पास किया। कांग्रेस ने भारतीयों से 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाने को कहा। उस दिन देश भर में लोगों ने पूर्ण स्वतंत्रता की शपथ ली, और 1947 तक हर साल यह तारीख़ मनाई जाती रही।

15 अगस्त 1947 को आज़ादी के बाद संविधान सभा ने संविधान पर अपना काम जारी रखा। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. आंबेडकर थे। सभा ने लगभग तीन साल तक हर अनुच्छेद पर बहस की। इसने 26 नवंबर 1949 को अंतिम पाठ अपनाया, और यह तारीख़ अब संविधान दिवस के रूप में मनाई जाती है। नेताओं ने संविधान को 26 जनवरी 1950 से लागू करने का फ़ैसला किया, ताकि पुराने पूर्ण स्वराज दिवस को एक नया अर्थ मिल सके।

उस दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पहली परेड इरविन एम्फ़ीथिएटर में हुई, जिस मैदान को अब दिल्ली का मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम कहा जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे। बाद के वर्षों में परेड राजपथ पर होने लगी, जो राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच का भव्य मार्ग है। 2022 में इस सड़क का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया।

हर साल भारत एक या अधिक विदेशी नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाता है। 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष मुख्य अतिथि थे। परेड की थीम राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर थी।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारह नेताओं के पेंसिल स्केच: महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रानी लक्ष्मीबाई, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सरोजिनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और डॉ. बी. आर. आंबेडकर।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारह नेता, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर उनके साहस को याद करने के लिए पेंसिल से बनाए गए। ICC Holidays, मौलिक पेंसिल-शैली स्केच

गणतंत्र दिवस कैसे मनाते हैं

समारोह 25 जनवरी की शाम को शुरू होते हैं, जब राष्ट्रपति रेडियो और टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। सरकार इसी समय के आसपास पद्म पुरस्कारों और वीरता पुरस्कारों की घोषणा भी करती है।

26 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री देश के लिए जान देने वाले सैनिकों को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के साथ कर्तव्य पथ पहुँचते हैं। राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, राष्ट्रगान बजता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है। अशोक चक्र जैसे वीरता पुरस्कार वहीं प्रदान किए जा सकते हैं।

परेड एक तय क्रम में चलती है। थल सेना, नौसेना और वायु सेना की मार्चिंग टुकड़ियाँ सलामी मंच के सामने से गुज़रती हैं, और उनके बाद अर्धसैनिक बल, NCC और बैंड आते हैं। टैंक, मिसाइलें और दूसरे उपकरण सामने से गुज़रते हैं। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की रंगीन झाँकियाँ स्थानीय संस्कृति, इतिहास और विकास योजनाएँ दिखाती हैं। स्कूली बच्चे लोक नृत्य पेश करते हैं। कार्यक्रम लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों के फ़्लाईपास्ट के साथ ख़त्म होता है।

पूरे देश में राज्यपाल राज्यों की राजधानियों में और ज़िला अधिकारी ज़िला मुख्यालयों पर झंडा फहराते हैं। स्कूलों में ध्वजारोहण, भाषण, प्रश्नोत्तरी और देशभक्ति गीत होते हैं, और लड्डू जैसी मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। बहुत से लोग तिरंगे के बिल्ले लगाते हैं। हाउसिंग सोसाइटियाँ और दफ़्तर छोटे ध्वजारोहण समारोह करते हैं।

समारोह औपचारिक रूप से 29 जनवरी की शाम विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ संपन्न होते हैं। सूर्यास्त के समय सेना के बैंड धुनें बजाते हैं और झंडे उतारे जाते हैं, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन और आसपास की इमारतें रोशनी से जगमगा उठती हैं।

महत्वपूर्ण दिन और पल

  1. राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन (25 जनवरी की शाम)
    राष्ट्रपति रेडियो और टीवी पर नागरिकों से बात करते हैं और बीते वर्ष और संविधान के मूल्यों पर विचार रखते हैं। लगभग इसी समय पद्म पुरस्कार पाने वालों के नाम घोषित होते हैं।
  2. राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पण (26 जनवरी की सुबह (2026 में सोमवार))
    परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं।
  3. ध्वजारोहण और गणतंत्र दिवस परेड (26 जनवरी की सुबह)
    राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर झंडा फहराते हैं, जिसके बाद राष्ट्रगान, 21 तोपों की सलामी, मार्चिंग टुकड़ियाँ, राज्यों की झाँकियाँ और वायु सेना का फ़्लाईपास्ट होता है।
  4. बीटिंग रिट्रीट समारोह (29 जनवरी की शाम)
    सूर्यास्त के समय विजय चौक पर सेना के बैंड प्रस्तुति देते हैं और गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन होता है।

भारत भर में गणतंत्र दिवस

हर राज्य अपना सरकारी समारोह करता है। उत्तराखंड में राज्य का मुख्य समारोह आमतौर पर देहरादून के परेड ग्राउंड में होता है, जहाँ राज्यपाल झंडा फहराते हैं, परेड का निरीक्षण करते हैं और राज्य के विभागों की झाँकियाँ देखते हैं। गढ़वाल और कुमाऊँ के ज़िला मुख्यालयों पर भी ऐसे ही समारोह होते हैं।

उत्तराखंड से बड़ी संख्या में युवा सशस्त्र बलों में जाते हैं, इसलिए पहाड़ के कई परिवारों के लिए यह दिन ख़ास गर्व का होता है। राज्य से गहराई से जुड़ी रेजिमेंटें, जैसे गढ़वाल राइफ़ल्स और कुमाऊँ रेजिमेंट, कई बार कर्तव्य पथ पर मार्च कर चुकी हैं। देहरादून में स्कूल, कॉलेज और पूर्व सैनिकों के संगठन भी अपने कार्यक्रम करते हैं।

अन्य नाम और संबंधित त्योहार

  • 26 जनवरी
  • गणतंत्र दिवस

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में गणतंत्र दिवस कब है?

गणतंत्र दिवस मंगलवार, 26 जनवरी 2027 को है।

क्या गणतंत्र दिवस पर बैंक बंद रहते हैं?

2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।

क्या गणतंत्र दिवस केंद्र सरकार की छुट्टी है?

हाँ। गणतंत्र दिवस 2027 में केंद्र सरकार के सभी दफ़्तरों की अनिवार्य छुट्टियों में से एक है।

गणतंत्र दिवस के अन्य नाम क्या हैं?

गणतंत्र दिवस को 26 जनवरी और गणतंत्र दिवस भी कहा जाता है।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है?

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। यह तारीख़ इसलिए चुनी गई क्योंकि कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया था, जब भारतीयों ने पूर्ण स्वतंत्रता पाने की शपथ ली थी।

गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस में क्या अंतर है?

15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस 1947 में ब्रिटिश शासन से मिली आज़ादी की याद है। गणतंत्र दिवस 1950 में संविधान लागू होने की याद है, जब भारत एक गणराज्य बना और निर्वाचित राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष बने।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज कौन फहराता है?

भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर झंडा फहराते हैं। राज्यों में यह समारोह राज्यपाल करते हैं, जबकि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल क़िले पर झंडा फहराते हैं।

संविधान कब अपनाया गया?

संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया। यह दिन अब संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, और संविधान दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य अतिथि कौन थे?

77वें गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष थे। परेड की थीम वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर थी।

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