हिंदू
रक्षा बंधन 2027 Raksha Bandhan
भाई-बहन के प्रेम का त्योहार
मंगलवार, 17 अगस्त 2027
चंद्र पंचांग: 17 अग 2027
पूर्णिमा (15), शुक्ल पक्ष (पूरा चाँद)
माह: श्रावण (पूर्णिमांत, उत्तर भारत)
विक्रम संवत 2084 · शक संवत 1949
रक्षा बंधन उस पूर्णिमा को आता है जिससे श्रावण का शुक्ल पक्ष पूरा होता है, इसलिए दोनों पंचांग पद्धतियों में इसे श्रावण पूर्णिमा कहा जाता है।
रक्षा बंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है। श्रावण की पूर्णिमा पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और उनकी कुशलता की प्रार्थना करती हैं।
तारीख कैसे तय होती है: हिंदू माह श्रावण की पूर्णिमा

रक्षा बंधन की तारीखें 2027
| दिन | 2027 | क्या होता है |
|---|---|---|
| रक्षा बंधन (श्रावण पूर्णिमा) | मंगल, 17 अग | दोपहर में भद्रा के बाहर राखी बाँधना; उपाकर्म पर जनेऊ बदलना। |
रक्षा बंधन एक दिन का त्योहार है; इसके एक हफ़्ते बाद, 24 अगस्त 2027 को जन्माष्टमी आती है।
रक्षा बंधन क्यों मनाते हैं
"रक्षा" का अर्थ है सुरक्षा और "बंधन" का अर्थ है जुड़ाव। इस दिन बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है, उसके माथे पर तिलक लगाती है और उसकी लंबी उम्र, सेहत और सफलता की प्रार्थना करती है। भाई उसे उपहार देता है और वचन देता है कि वह जीवन भर उसकी रक्षा करेगा और उसका साथ देगा। धागे की क़ीमत बहुत कम होती है, लेकिन उसके साथ जुड़ा वचन ही इस त्योहार का असली सार है।
समय के साथ इसका अर्थ और व्यापक हुआ है। बहनें एक-दूसरे को राखी बाँधती हैं, चचेरे-ममेरे भाई-बहन और करीबी दोस्त राखियाँ बदलते हैं, और कई महिलाएँ सैनिकों, पुलिसकर्मियों और समाजसेवियों को उनकी सेवा के लिए धन्यवाद के रूप में राखी बाँधती हैं। स्कूली बच्चे प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेते हुए पेड़ों पर राखी बाँधते हैं। आज यह त्योहार केवल सगे भाई-बहनों का नहीं, बल्कि हर करीबी रिश्ते में देखभाल और कर्तव्य की बात करता है।
यह परिवारों को जोड़े भी रखता है। शादीशुदा बेटियाँ अक्सर इस दिन मायके जाती हैं, और जो भाई-बहन दूसरे शहरों या विदेश में रहते हैं, वे हफ़्तों पहले डाक से राखियाँ भेज देते हैं।
रक्षा बंधन का इतिहास और कथा
रक्षा के धागे का विचार बहुत पुराना है। वैदिक परंपरा में पुरोहित मंत्र पढ़ते हुए अपने यजमानों की कलाई पर पवित्र धागा, यानी रक्षा सूत्र, बाँधते थे। राखी बाँधते समय आज भी पढ़ा जाने वाला एक श्लोक याद दिलाता है कि ऐसे ही धागे ने उदार असुर राजा बलि को उसके वचन से बाँध दिया था।
पुराणों में कई कथाएँ मिलती हैं। एक कथा में इंद्र असुरों के साथ लंबे युद्ध में हार रहे थे। उनकी पत्नी इंद्राणी, जिन्हें शची भी कहते हैं, ने मंत्रों से अभिमंत्रित धागा उनकी कलाई पर बाँधा, और इंद्र युद्ध जीत गए। एक और कथा कहती है कि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बाँधी ताकि वे भगवान विष्णु को मुक्त कर दें, जो बलि के महल में उसके पहरेदार बनकर रह रहे थे। बलि ने लक्ष्मी को बहन माना और विष्णु को घर जाने दिया। तीसरी कथा मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना की है। परंपरा के अनुसार यमुना ने यम को राखी बाँधी, और यम ने उन्हें आशीर्वाद देकर घोषणा की कि जो भाई अपनी बहन से राखी बँधवाएगा, उसकी रक्षा होगी।
सबसे प्रिय कथा महाभारत की परंपरा से आती है। जब कृष्ण की उँगली कट गई, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक पट्टी फाड़कर घाव पर बाँध दी। कृष्ण ने उसकी रक्षा का वचन दिया, और भक्त मानते हैं कि जब कौरवों की सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, तब उन्होंने यह वचन निभाया।
बाद के वृत्तांत और कथाएँ जोड़ते हैं। एक बहुत प्रचलित कथा के अनुसार मेवाड़ की रानी कर्णावती ने मदद माँगने के लिए मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजी थी, हालाँकि इतिहासकार इसके विवरण पर एकमत नहीं हैं। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने हिंदुओं और मुसलमानों से एकता के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को राखी बाँधने का आह्वान किया था।
रक्षा बंधन कैसे मनाते हैं
दिन की शुरुआत स्नान और नए या साफ़ कपड़ों से होती है। बहन राखी, रोली या कुमकुम, चावल के कुछ दाने, छोटा दीया और मिठाई रखकर पूजा की थाली तैयार करती है। कई परिवार दोपहर में राखी बाँधते हैं, और पहले यह देख लेते हैं कि समय भद्रा से मुक्त हो, क्योंकि भद्रा काल को इस रस्म के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसके लिए वे स्थानीय पंचांग देखते हैं।
भाई पूर्व की ओर मुँह करके बैठता है, अक्सर सिर पर रूमाल या टोपी रखकर। बहन दीया जलाकर उसकी आरती उतारती है, रोली का तिलक लगाती है, उस पर चावल के दाने लगाती है, राखी बाँधती है और उसके मुँह में मिठाई रखती है। भाई बड़ी बहन के पैर छूता है, उसे उपहार या पैसे देता है और रक्षा का अपना वचन दोहराता है। जहाँ भाई दूर रहता है, वहाँ बहनें उसकी फ़ोटो पर राखी बाँधती हैं या कार्ड के साथ राखी भेज देती हैं, और कई बहनें सबसे पहले घर के कृष्ण या गणेश की मूर्ति पर राखी बाँधती हैं।
घरों में घेवर, खीर, लड्डू और पूरी-सब्ज़ी जैसे त्योहारी पकवान बनते हैं, और दोपहर भर रिश्तेदार एक-दूसरे के घर आते-जाते हैं।
कई परिवारों में जनेऊ पहनने वाले पुरुष इसी पूर्णिमा पर उपाकर्म नाम की रस्म में अपना जनेऊ बदलते हैं। वे स्नान करते हैं, ऋषियों का तर्पण करते हैं और आने वाले साल के लिए नया जनेऊ पहनते हैं।
रक्षा बंधन के प्रतीक, पकवान और रीति-रिवाज
राखी ख़ुद इस त्योहार का मुख्य प्रतीक है। पहले यह लाल और पीले सूती धागे की सादी डोरी होती थी, जिसे अक्सर मौली या कलावा कहते हैं, और कई परिवार आज भी यही सादा धागा बाँधते हैं। आज राखियाँ मोतियों, नगों, ज़री, गणेश या कृष्ण की छोटी मूर्तियों और चाँदी या सोने के लॉकेट के साथ आती हैं। बच्चों को कार्टून कैरेक्टर और लाइट वाली राखियाँ बहुत पसंद हैं, और बीजों या कपड़े से बनी पर्यावरण के अनुकूल राखियाँ भी अब आम हैं।
पूजा की थाली में बाक़ी प्रतीक होते हैं। रोली आशीर्वाद और सौभाग्य का, चावल के दाने (अक्षत) पूर्णता का, दीया रोशनी और रक्षा का और मिठाई रिश्ते की मिठास का प्रतीक है। कुछ घरों में नारियल या कुछ फूल भी रखे जाते हैं।
खान-पान इस दिन का बड़ा हिस्सा है। राजस्थान की जालीदार मिठाई घेवर पूरे उत्तर भारत में राखी की ख़ास मिठाई है, साथ में काजू कतली, बेसन के लड्डू, रसगुल्ले और खीर भी। कई घरों में दोपहर के खाने में पूरी, आलू की सब्ज़ी और दही भल्ले बनते हैं।
भाई का उपहार इस रस्म को पूरा करता है। यह लिफ़ाफ़े में नकद, कपड़े, गहने या कोई गैजेट हो सकता है, और अब ज़्यादा से ज़्यादा भाई बहन के नाम पर बचत या बीमा उपहार में देते हैं। जो बहनें मिल नहीं पातीं, वे कार्ड और मिठाई के डिब्बे के साथ राखी भेजती हैं।
भारत भर में रक्षा बंधन
यही पूर्णिमा पूरे भारत में कई नामों से जानी जाती है। तटीय महाराष्ट्र और गोवा में नारली पूर्णिमा मनाई जाती है, जब मछुआरा समुदाय नए मछली पकड़ने के मौसम से पहले समुद्र को नारियल अर्पित करते हैं। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में यह आवणि अवित्तम है, उपाकर्म का मुख्य दिन। ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा मनाई जाती है, जब मवेशियों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है, और बंगाल में राधा-कृष्ण के झूलों के उत्सव के साथ झूलन पूर्णिमा होती है। राजस्थान में बहनें भाभी की चूड़ी पर लुंबा राखी भी बाँधती हैं।
उत्तराखंड के कुमाऊँ में इस दिन को जनोपुण्यु कहते हैं, जब पुरुष पूजा के बाद अपना जनेऊ बदलते हैं। इसी दिन चंपावत ज़िले में वाराही देवी मंदिर के देवीधुरा मेले में बग्वाल होता है, जो गाँववालों के चार दलों के बीच एक पारंपरिक प्रतीकात्मक युद्ध है। पहले यह पत्थरों से लड़ा जाता था, और आज ज़्यादातर फलों और फूलों से खेला जाता है। देहरादून में त्योहार से पहले के दिनों में पलटन बाज़ार राखी के स्टॉलों से भर जाता है।
रक्षा बंधन पर दफ़्तर, बैंक, बाज़ार और यात्रा
2027 में रक्षा बंधन केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने इसे सार्वजनिक अवकाश रखा है, इसलिए छुट्टी की स्थिति इस पर निर्भर करती है कि आप कहाँ रहते हैं।
रक्षा बंधन मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को है। 2027 की केंद्र सरकार की सूची में यह प्रतिबंधित अवकाश है, इसलिए केंद्रीय कर्मचारी अपने प्रतिबंधित अवकाश कोटे से छुट्टी ले सकते हैं, जबकि दफ़्तर खुले रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखंड हाई कोर्ट 17 अगस्त 2027 को बंद रहेंगे। राज्य सरकारें और बैंक आमतौर पर अपनी 2027 की अवकाश सूचियाँ दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में जारी करते हैं, इसलिए योजना बनाने से पहले वे सूचियाँ देख लें।
2026 का पैटर्न अंदाज़ा देता है कि क्या उम्मीद करें। 28 अगस्त 2026 को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने सार्वजनिक अवकाश के लिए अपने राज्य सरकार के दफ़्तर बंद रखे, देहरादून, लखनऊ और कानपुर में बैंक बंद रहे, और उत्तराखंड में स्कूल बंद रहे। दिल्ली और बिहार ने इसे राज्य कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश रखा, और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी यह प्रतिबंधित अवकाश था।
त्योहार से पहले वाले हफ़्ते में बाज़ार सबसे व्यस्त रहते हैं, और मिठाई की दुकानों, राखी के स्टॉलों और गिफ़्ट शॉप पर भीड़ रहती है। राखियाँ जल्दी पोस्ट करें, क्योंकि कूरियर और डाक सेवाएँ बहुत व्यस्त हो जाती हैं। एक दिन पहले बसें और ट्रेनें भर जाती हैं, क्योंकि कई शादीशुदा बेटियाँ मायके जाती हैं।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- राखी
- राखी पूर्णिमा
- रक्षाबंधन
- श्रावण पूर्णिमा
भाई दूज 31 अक्टू 2027
गुरु पूर्णिमा 18 जुल 2027
नाग पंचमी 6 अग 2027
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में रक्षा बंधन कब है?
रक्षा बंधन मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को है।
क्या रक्षा बंधन पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या रक्षा बंधन केंद्र सरकार की छुट्टी है?
रक्षा बंधन प्रतिबंधित अवकाश है। केंद्र सरकार के कर्मचारी इसे साल के अपने दो प्रतिबंधित अवकाशों में से एक के रूप में ले सकते हैं।
रक्षा बंधन के अन्य नाम क्या हैं?
रक्षा बंधन को राखी, राखी पूर्णिमा, रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा भी कहा जाता है।
रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?
यह भाई-बहन के बीच रक्षा और प्रेम के रिश्ते का उत्सव है। बहन राखी बाँधकर भाई के लिए प्रार्थना करती है, और भाई उसका साथ देने का वचन देता है।
क्या बहन दूसरी बहन को राखी बाँध सकती है?
हाँ। कई बहनें एक-दूसरे को राखी बाँधती हैं, और भाभी को बाँधी जाने वाली लुंबा राखी की परंपरा भी राजस्थान और गुजरात में आम है।
कृष्ण और द्रौपदी की कथा क्या है?
परंपरा के अनुसार द्रौपदी ने कृष्ण की कटी उँगली पर पट्टी बाँधने के लिए अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा। कृष्ण ने उसकी रक्षा का वचन दिया, और माना जाता है कि उन्होंने कौरवों की सभा में उसकी लाज बचाई।
क्या 2027 में रक्षा बंधन की छुट्टी है?
2027 में यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रतिबंधित अवकाश है, और उस दिन सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखंड हाई कोर्ट बंद रहेंगे। 2027 की राज्य और बैंक सूचियाँ आमतौर पर दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में आती हैं।
अगले 30 दिनों के हिंदू त्योहार
-
17 अक्टूशनि
दुर्गा पूजा
-
18 अक्टूरवि
दुर्गा पूजा (महा सप्तमी)
-
19 अक्टूसोम
दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)
-
20 अक्टूमंगल
दशहरा
-
20 अक्टूमंगल
महा नवमी
-
25 अक्टूरवि
शरद पूर्णिमा
-
26 अक्टूसोम
महर्षि वाल्मीकि जयंती
-
29 अक्टूगुरु
करवा चौथ
-
6 नवंशुक्र
धनतेरस
-
8 नवंरवि
दिवाली
-
8 नवंरवि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
-
8 नवंरवि
लक्ष्मी पूजा
-
9 नवंसोम
गोवर्धन पूजा
-
11 नवंबुध
भाई दूज
प्रमुख हिंदू त्योहार
केंद्र सरकार की आने वाली छुट्टियाँ
आपके राज्य की छुट्टियाँ
बैंक, राज्य सरकार और स्कूलों की छुट्टियाँ हर राज्य में अलग होती हैं। अपना राज्य चुनें:
छुट्टियों और त्योहारों का कैलेंडर: अक्टूबर और नवंबर 2026
पूरे भारत के लिए केंद्र सरकार की छुट्टियाँ और प्रमुख त्योहार। बैंक, राज्य सरकार और स्कूलों की छुट्टियों के लिए अपना राज्य खोलें: असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश.
| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2
शुक्रवार, 2 अक्टूबर गांधी जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता और सत्य व अहिंसा की आवाज़ महात्मा गांधी की जयंती है। |
3 | 4 | |||
| 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11
रविवार, 11 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा का नौ रातों का शरद ऋतु का त्योहार है, जो घटस्थापना से शुरू होकर दशहरे तक चलता है। इसमें व्रत, पूजा-पाठ, गरबा और दुर्गा पूजा होती है। |
| 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17
शनिवार, 17 अक्टूबर दुर्गा पूजा दुर्गा पूजा महिषासुर राक्षस पर देवी दुर्गा की जीत का उत्सव है। भव्य पंडाल, ढाक की थाप, पूजा-अर्चना और भोज इसकी पहचान हैं, ख़ासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत... |
18 |
| 19 | 20
मंगलवार, 20 अक्टूबर दशहरा दशहरा, यानी विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। |
21 | 22 | 23 | 24 | 25 |
| 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 |
| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ||||||
| 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8
रविवार, 8 नवंबर दिवाली रोशनी का त्योहार दिवाली अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। कार्तिक की अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा होती है, दीयों की कतारें जलती हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं और... |
| 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15
रविवार, 15 नवंबर छठ पूजा छठ पूजा बिहार और पूर्वी भारत का चार दिन का त्योहार है, जिसमें व्रती उपवास रखते हैं और पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। |
| 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
| 23 | 24
मंगलवार, 24 नवंबर गुरु नानक जयंती गुरु नानक जयंती, जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म का उत्सव है। इस दिन अरदास, नगर कीर्तन, लंगर होते हैं और गुरुद्वा... |
25 | 26 | 27 | 28 | 29 |
| 30 |
सार्वजनिक छुट्टी प्रमुख त्योहार आज
- शनि, 17 अक्टू
दुर्गा पूजा
- मंगल, 20 अक्टू
दशहरा
- रवि, 8 नवं
दिवाली
- रवि, 15 नवं
छठ पूजा
- मंगल, 24 नवं
गुरु नानक जयंती