हिंदू
अक्षय तृतीया 2027 Akshaya Tritiya
नई शुरुआत का सबसे शुभ दिन
शनिवार, 8 मई 2027
चंद्र पंचांग: 8 मई 2027
तृतीया (3), शुक्ल पक्ष
माह: वैशाख (पूर्णिमांत, उत्तर भारत)
विक्रम संवत 2084 · शक संवत 1949
अक्षय तृतीया महीने के शुक्ल पक्ष में आती है, जिसमें दोनों पंचांग पद्धतियाँ महीने का एक ही नाम, वैशाख, इस्तेमाल करती हैं।
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया का दिन है, जिसे हिंदू और जैन पूरी तरह शुभ मानते हैं। इस दिन सोना ख़रीदने, विवाह, दान और नई शुरुआत का फल कभी क्षीण नहीं होता, ऐसी मान्यता है।
तारीख कैसे तय होती है: हिंदू माह वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरी चंद्र तिथि), उस दिन मनाई जाती है जिस दिन मध्याह्न में तृतीया तिथि हो

अक्षय तृतीया: दिन-ब-दिन 2027
| दिन | 2027 | क्या होता है |
|---|---|---|
| अक्षय तृतीया | शनि, 8 मई | विष्णु लक्ष्मी पूजा, सोने की ख़रीद, दान और बिना अलग मुहूर्त के विवाह। |
| परशुराम जयंती | शनि, 8 मई | उसी तृतीया को विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मदिन। |
अक्षय तृतीया एक दिन का त्योहार है, और 2026 व 2027 दोनों में परशुराम जयंती इसी दिन पड़ती है।
अक्षय तृतीया क्यों मनाते हैं
"अक्षय" का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, जो कभी ख़त्म न हो, और "तृतीया" तीसरी चंद्र तिथि है। हिंदुओं का विश्वास है कि इस दिन किया गया कोई भी अच्छा काम, चाहे प्रार्थना हो, ज़रूरतमंद को दान हो या किसी नए काम की शुरुआत, ऐसा फल देता है जो बढ़ता ही जाता है और कभी घटता नहीं। अक्षय तृतीया पर लोग जो कुछ भी करते हैं, उसके पीछे लगभग यही विश्वास होता है।
यह हिंदू वर्ष के उन गिने-चुने दिनों में से है जिनके लिए अलग से मुहूर्त निकालने की ज़रूरत नहीं होती। पुरोहित इसे अबूझ मुहूर्त कहते हैं, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूरा समय शुभ। इसलिए परिवार विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, ज़मीन या मकान की ख़रीद और दुकान व दफ़्तर का शुभारंभ इसी तारीख़ को रखते हैं, और समय के लिए पंडित से पूछने की ज़रूरत नहीं समझते।
फिर भी ज़्यादातर घरों के लिए अक्षय तृतीया सोना ख़रीदने का दिन है। इस दिन ख़रीदा गया छोटा सा सिक्का या गहना परिवार की स्थायी समृद्धि का बीज माना जाता है, और टिकाऊ धन के लिए देवी लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की पूजा की जाती है। दान का महत्व भी उतना ही है। वैशाख की गर्मी में जल, अन्न, पंखे, छाते और कपड़े दान करने से ऐसा पुण्य मिलता है जो कभी समाप्त नहीं होता, ऐसा माना जाता है।
अक्षय तृतीया का इतिहास और कथा
सबसे प्रिय कथा महाभारत की परंपरा से आती है। वनवास के दौरान पांडवों और द्रौपदी को अपने पास आने वाले अनेक ऋषियों और अतिथियों को भोजन कराने में कठिनाई होती थी। परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण ने उन्हें अक्षय पात्र का आशीर्वाद दिया, एक ऐसा बर्तन जो हर दिन द्रौपदी के भोजन कर लेने तक लगातार भोजन देता रहता था। कुछ कथाओं में कहा जाता है कि युधिष्ठिर की प्रार्थना पर यह पात्र पहले सूर्य देव से मिला था और कृष्ण ने उन्हें इसकी शक्ति दिखाई। भक्त कभी ख़ाली न होने वाले इस पात्र के वरदान को अक्षय तृतीया से जोड़ते हैं, और यह पात्र इस त्योहार का प्रतीक बन गया है।
एक और कथा कृष्ण के बचपन के ग़रीब मित्र सुदामा की है, जो भेंट के रूप में केवल मुट्ठी भर चिवड़ा लेकर पैदल द्वारका पहुँचे। कृष्ण ने उसे बड़े प्रेम से खाया, और जब सुदामा घर लौटे तो उनकी झोपड़ी महल बन चुकी थी। कई परिवार इस दिन सादी भेंट देते समय यह कथा याद करते हैं।
इसी तिथि को परशुराम जयंती भी मनाई जाती है, जो फरसा धारण करने वाले विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मदिन है। परंपरा के अनुसार राजा भगीरथ की लंबी तपस्या के बाद गंगा अक्षय तृतीया को ही स्वर्ग से धरती पर उतरीं, और चार युगों में दूसरा, त्रेता युग, भी इसी दिन शुरू हुआ। कुछ वृत्तांतों के अनुसार वेद व्यास ने अक्षय तृतीया को ही भगवान गणेश को महाभारत लिखवाना शुरू किया था।
जैनों के लिए यह दिन पहले तीर्थंकर ऋषभदेव के लगभग एक वर्ष लंबे उपवास के समापन का दिन है। हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस ने उन्हें गन्ने का रस अर्पित किया था, और भोजन की उस पहली भेंट को हर साल याद किया जाता है।
अक्षय तृतीया कैसे मनाते हैं
दिन की शुरुआत सुबह जल्दी होती है। बहुत से लोग नदी में स्नान करते हैं या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाते हैं, साफ़ या नए कपड़े पहनते हैं और भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी की पूजा की तैयारी करते हैं। भोग में पीले फूल, तुलसी के पत्ते, चंदन, जौ या चावल और गुड़ के साथ भिगोई चने की दाल चढ़ाई जाती है। कुछ परिवार भगवान गणेश और कुबेर की भी पूजा करते हैं, और कुछ लोग मध्याह्न की पूजा तक व्रत रखते हैं। मुख्य पूजा दिन के बीच में करना अच्छा माना जाता है, जब तृतीया तिथि लगी हो।
दान इस दिन का मुख्य संस्कार है। लोग पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, जिसे मटका या कलश कहते हैं, और साथ में पंखे, छाते, चप्पल, अनाज, चीनी, दही और फल दान करते हैं, जो सब गर्मी के मौसम के अनुकूल हैं। दुकानें और मंदिर राहगीरों को ठंडा पानी और शरबत पिलाने के लिए छबील लगाते हैं। गायों, ब्राह्मणों और ग़रीबों को भोजन कराना आम है।
पूजा के बाद ख़रीदारी होती है। परिवार सोने के सिक्के, चेन और चूड़ियाँ लेने सुनार के पास जाते हैं, और जिनके लिए सोना महँगा है वे चाँदी ख़रीदते हैं। कुछ लोग गाड़ी बुक करते हैं, संपत्ति के काग़ज़ों पर दस्तख़त करते हैं या रिकरिंग डिपॉज़िट शुरू करते हैं, इस उम्मीद में कि उनकी मेहनत का फल बिना रुके बढ़ता रहे।
इस तारीख़ को उत्तर और पश्चिम भारत में बड़ी संख्या में विवाह होते हैं, क्योंकि इसके लिए अलग मुहूर्त की ज़रूरत नहीं होती।
अक्षय तृतीया के प्रतीक, पकवान और रीति-रिवाज
सोना अक्षय तृतीया का मुख्य प्रतीक है। लक्ष्मी या गणेश की छवि वाला सिक्का, पतली चेन या कानों की बालियों की जोड़ी पूजा में रखी जाती है और फिर घर के लिए स्थायी आशीर्वाद के रूप में सँभालकर रख दी जाती है। कई परिवारों में चाँदी के सिक्के और बर्तन इसकी जगह लेते हैं।
कभी ख़ाली न होने वाला अक्षय पात्र दूसरों के साथ बाँटी जाने वाली समृद्धि का प्रतीक है। कई घरों में इसकी याद में इस दिन पूजा स्थान पर चावल या अनाज से भरा बर्तन रखा जाता है। मिट्टी का घड़ा, यानी मटका, गर्मी में दान का प्रतीक है, और पानी से भरा मटका दान करना पुण्य का आम काम है।
उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मंदिरों की शोभा यात्राओं में भगवान परशुराम का फरसा दिखाई देता है, और ब्राह्मण समुदाय उनकी छवि की पूजा करते हैं। जैनों के लिए गन्ने के रस का गिलास, जिसे इक्षु रस कहते हैं, ऋषभदेव को अर्पित पहले भोजन की याद दिलाता है।
भोजन हल्का और मौसमी होता है। गुड़ के साथ भिगोई चने की दाल, खीर, सत्तू, खीरा, आम और बेल या गुलाब का शरबत भोग में चढ़ाया और बाँटा जाता है। ओडिशा में नए मौसम की पहली फ़सल की योजना इसी दिन बनती है, और राजस्थान में आखा तीज के विवाहों के लिए घरों में खीचड़ा और मिठाइयाँ बनती हैं।
भारत भर में अक्षय तृतीया
राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस दिन को आखा तीज कहते हैं और यह साल की सबसे बड़ी विवाह तिथियों में से एक है, जब कई शहरों में सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। गुजरात में इसे अखात्रीज कहते हैं, और कई गाँवों में किसान बुआई शुरू करते हैं या नई फ़सल के लिए खेत तैयार करते हैं। ओडिशा में किसान अक्षय तृतीया के अनुष्ठान से मौसम की बुआई शुरू करते हैं, और पुरी की रथ यात्रा के विशाल रथों का निर्माण भी इसी दिन शुरू होता है। दक्षिण में, ख़ासकर तमिलनाडु और कर्नाटक में, अक्षय तृतीया पर सोना ख़रीदने की मज़बूत परंपरा है और सुनार अपनी दुकानें जल्दी खोलते हैं।
उत्तराखंड में अक्षय तृतीया चार धाम यात्रा से गहराई से जुड़ी है। पुरानी परंपरा के अनुसार सर्दियों में बंद रहने के बाद गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट इसी दिन के आसपास खुलते हैं, और इसके कुछ ही समय बाद गढ़वाल की पहाड़ियों में यात्रा का मौसम शुरू हो जाता है, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट उनके पुजारियों द्वारा तय तिथियों पर खुलते हैं। कपाट खुलने की सटीक तिथियाँ हर साल मंदिर समितियाँ घोषित करती हैं। देहरादून और हरिद्वार में इस दिन गंगा स्नान के लिए भीड़ उमड़ती है और शहर के बाज़ारों में गहनों की दुकानों पर रौनक रहती है।
जैनों में जो लोग वर्षी तप, यानी एक साल तक एक दिन छोड़कर उपवास, पूरा करते हैं, वे गन्ने के रस से उपवास तोड़ते हैं। यह पारणा उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर, गुजरात के पालिताणा और पूरे भारत के जैन मंदिरों में होता है।
अक्षय तृतीया पर दफ़्तर, बैंक, बाज़ार और यात्रा
अक्षय तृतीया प्रतिबंधित अवकाश है, राजपत्रित अवकाश नहीं: 2026 में यह बिहार में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए केंद्र की प्रतिबंधित अवकाश सूची में थी। 2027 की सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं।
अक्षय तृतीया भारत में राजपत्रित अवकाश नहीं है। 2026 में यह पटना की समन्वय समिति द्वारा बिहार में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जारी केंद्र सरकार की प्रतिबंधित अवकाश सूची में थी, यानी वहाँ के कर्मचारी इसे अपनी वैकल्पिक छुट्टियों में से एक के रूप में चुन सकते थे। इसके अलावा सरकारी दफ़्तर, बैंक और स्कूल सामान्य रूप से खुले रहे। 2027 की राज्य और बैंक अवकाश सूचियाँ अभी प्रकाशित नहीं हुई हैं, इसलिए 8 मई 2027 के आसपास कोई योजना बनाने से पहले, सूचियाँ जारी होने पर उन्हें देख लें।
इस दिन सार्वजनिक जीवन में सबसे ज़्यादा भीड़ बाज़ारों में होती है। ज़्यादातर शहरों में गहनों की दुकानें जल्दी खुलती हैं, देर तक खुली रहती हैं और ख़ास योजनाएँ देती हैं, और सोने चाँदी की बिक्री तेज़ी से बढ़ती है। रियल एस्टेट और गाड़ियों के डीलरों के यहाँ भी भारी बुकिंग होती है। उत्तर और पश्चिम भारत में शादियों की भीड़ रहती है, बैंक्वेट हॉल और बैंड पहले से बुक हो जाते हैं, इसलिए कम समय में जगह और कैटरर मिलना मुश्किल होता है।
उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का मौसम शुरू होने से ऋषिकेश से उत्तरकाशी तक की सड़कों पर तीर्थयात्रियों की भारी आवाजाही रहती है। यात्रियों को यात्रा के लिए पंजीकरण कराना चाहिए और निकलने से पहले सड़क और मौसम की जानकारी देख लेनी चाहिए।
अन्य नाम और संबंधित त्योहार
- आखा तीज
- अक्षय तीज
- अकती
- परशुराम जयंती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2027 में अक्षय तृतीया कब है?
अक्षय तृतीया शनिवार, 8 मई 2027 को है।
क्या अक्षय तृतीया पर बैंक बंद रहते हैं?
2027 की RBI बैंक अवकाश सूचियाँ अभी जारी नहीं हुई हैं; ये आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में आती हैं। हर राज्य की अपनी सूची होती है, इसलिए तब अपने राज्य का बैंक अवकाश पेज देखें।
क्या अक्षय तृतीया केंद्र सरकार की छुट्टी है?
नहीं। अक्षय तृतीया 2027 की केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूची में नहीं है। 2027 में इस दिन शनिवार है, जब केंद्र सरकार के दफ़्तर वैसे भी बंद रहते हैं।
अक्षय तृतीया के अन्य नाम क्या हैं?
अक्षय तृतीया को आखा तीज, अक्षय तीज, अकती और परशुराम जयंती भी कहा जाता है।
अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है?
हिंदुओं का विश्वास है कि इस दिन किए गए अच्छे कामों का फल कभी क्षीण नहीं होता। यह दिन कृष्ण द्वारा पांडवों को अक्षय पात्र देने, परशुराम जयंती और परंपरा के अनुसार गंगा के धरती पर अवतरण से जुड़ा है।
अक्षय तृतीया पर लोग सोना क्यों ख़रीदते हैं?
सोना लक्ष्मी और स्थायी धन का प्रतीक है। परिवारों का विश्वास है कि इस दिन ख़रीदा गया सोना मूल्य में बढ़ता रहता है और घर में लगातार समृद्धि लाता है।
क्या अक्षय तृतीया पर विवाह के लिए मुहूर्त ज़रूरी है?
नहीं। यह दिन अबूझ मुहूर्त है, सूर्योदय से सूर्यास्त तक शुभ, इसलिए विवाह और दूसरे संस्कार अलग समय तय किए बिना होते हैं।
जैन अक्षय तृतीया पर क्या करते हैं?
जैन ऋषभदेव के गन्ने के रस से अपना लंबा उपवास तोड़ने को याद करते हैं। जो लोग वर्षी तप पूरा करते हैं, वे भी इस दिन इसी तरह अपना उपवास समाप्त करते हैं।
अक्षय तृतीया पर सोना ख़रीदने का सबसे अच्छा समय क्या है?
पूरा दिन शुभ माना जाता है, इसलिए कोई भी समय ठीक है। फिर भी कई परिवार मध्याह्न की पूजा के बाद ख़रीदना पसंद करते हैं, जब तृतीया तिथि लगी होती है।
क्या चार धाम यात्रा अक्षय तृतीया को शुरू होती है?
परंपरा के अनुसार गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर अक्षय तृतीया के आसपास खुलते हैं, और केदारनाथ व बद्रीनाथ इसके कुछ समय बाद। सटीक तिथियाँ हर साल मंदिर समितियाँ घोषित करती हैं।
अगले 30 दिनों के हिंदू त्योहार
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17 अक्टूशनि
दुर्गा पूजा
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18 अक्टूरवि
दुर्गा पूजा (महा सप्तमी)
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19 अक्टूसोम
दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी)
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20 अक्टूमंगल
दशहरा
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20 अक्टूमंगल
महा नवमी
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25 अक्टूरवि
शरद पूर्णिमा
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26 अक्टूसोम
महर्षि वाल्मीकि जयंती
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29 अक्टूगुरु
करवा चौथ
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6 नवंशुक्र
धनतेरस
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8 नवंरवि
दिवाली
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8 नवंरवि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
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8 नवंरवि
लक्ष्मी पूजा
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9 नवंसोम
गोवर्धन पूजा
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11 नवंबुध
भाई दूज
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पूरे भारत के लिए केंद्र सरकार की छुट्टियाँ और प्रमुख त्योहार। बैंक, राज्य सरकार और स्कूलों की छुट्टियों के लिए अपना राज्य खोलें: असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश.
| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
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शुक्रवार, 2 अक्टूबर गांधी जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता और सत्य व अहिंसा की आवाज़ महात्मा गांधी की जयंती है। |
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रविवार, 11 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा का नौ रातों का शरद ऋतु का त्योहार है, जो घटस्थापना से शुरू होकर दशहरे तक चलता है। इसमें व्रत, पूजा-पाठ, गरबा और दुर्गा पूजा होती है। |
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शनिवार, 17 अक्टूबर दुर्गा पूजा दुर्गा पूजा महिषासुर राक्षस पर देवी दुर्गा की जीत का उत्सव है। भव्य पंडाल, ढाक की थाप, पूजा-अर्चना और भोज इसकी पहचान हैं, ख़ासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत... |
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मंगलवार, 20 अक्टूबर दशहरा दशहरा, यानी विजयादशमी, बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत की याद दिलाता है। |
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| सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | रवि |
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रविवार, 8 नवंबर दिवाली रोशनी का त्योहार दिवाली अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। कार्तिक की अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा होती है, दीयों की कतारें जलती हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं और... |
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रविवार, 15 नवंबर छठ पूजा छठ पूजा बिहार और पूर्वी भारत का चार दिन का त्योहार है, जिसमें व्रती उपवास रखते हैं और पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। |
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मंगलवार, 24 नवंबर गुरु नानक जयंती गुरु नानक जयंती, जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म का उत्सव है। इस दिन अरदास, नगर कीर्तन, लंगर होते हैं और गुरुद्वा... |
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सार्वजनिक छुट्टी प्रमुख त्योहार आज
- शनि, 17 अक्टू
दुर्गा पूजा
- मंगल, 20 अक्टू
दशहरा
- रवि, 8 नवं
दिवाली
- रवि, 15 नवं
छठ पूजा
- मंगल, 24 नवं
गुरु नानक जयंती